साख विसर्जन पर सूखी नहरें, आस्था को ठेस, महिलाएं भटकीं, गंदे पानी में करना पड़ा विसर्जन

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साख विसर्जन पर सूखी नहरें, आस्था को ठेस, महिलाएं भटकीं, गंदे पानी में करना पड़ा विसर्जन


कठुआ, 27 मार्च (हि.स.)। चैत्र नवरात्रि के नौवें दिन जहां एक ओर माता रानी के साख विसर्जन के साथ पावन पर्व का समापन किया जाता है, वहीं कठुआ में इस बार श्रद्धालुओं की आस्था को गहरी ठेस पहुंची। शहर की प्रमुख नहरें और जल स्रोत सूखे मिलने से महिलाओं और भक्तों को विसर्जन के लिए दर-दर भटकना पड़ा। श्रद्धालुओं को माता रानी की साख विसर्जन के लिए बहता पानी तक नसीब नहीं हुआ।

सुबह जैसे ही श्रद्धालु माता की साख का विसर्जन करने घरों से निकले, उन्हें बहता पानी कहीं नहीं मिला। ड्रीम पार्क के पास स्थित कश्मीर नहर हो या कंडी क्षेत्र की अन्य नहरें, हर जगह सूखा ही नजर आया। हाथों में माता की साख लिए महिलाएं इधर-उधर भटकती रहीं लेकिन कहीं भी उचित स्थान नहीं मिला। आखिरकार मजबूरी में कई श्रद्धालु कठुआ शहर के प्राचीन बावलिया क्षेत्र पहुंचे, जहां पहले से गंदगी का अंबार लगा हुआ था। पास में बह रहे गंदे पानी में ही भक्तों को विसर्जन करना पड़ा जिसे लेकर महिलाओं में भारी नाराजगी देखी गई।

उनका कहना था कि यह उनकी आस्था के साथ खिलवाड़ है। श्रद्धालुओं ने सवाल उठाते हुए कहा कि छठ पूजा के दौरान प्रशासन द्वारा विशेष रूप से नहरों में पानी छोड़ा गया था जबकि चैत्र नवरात्रि जैसे महत्वपूर्ण हिंदू पर्व पर ऐसी कोई व्यवस्था नहीं की गई। उन्होंने जिला प्रशासन और जिम्मेदार अधिकारियों के साथ-साथ धर्म के ठेकेदारों पर भी लापरवाही के आरोप लगाए। महिलाओं ने कहा कि उन्होंने आठ दिन तक व्रत रखकर विधिवत पूजा-अर्चना की लेकिन अंतिम दिन विसर्जन के समय इस तरह की अव्यवस्था ने उनके मन को आहत कर दिया। उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि भविष्य में ऐसे महत्वपूर्ण धार्मिक अवसरों पर उचित प्रबंध सुनिश्चित किए जाएं, ताकि किसी की आस्था को ठेस न पहुंचे।

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हिन्दुस्थान समाचार / सचिन खजूरिया

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