डॉ. फारूक ने महिला अधिकारी के साथ दुर्व्यवहार करने वाले आईएएस अधिकारी पर जताई नाराजगी

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श्रीनगर, 16 अक्टूबर (हि.स.)

नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष डॉ. फारूक अब्दुल्ला ने शुक्रवार को कहा कि एक आईएएस अधिकारी को एक महिला अधिकारी के साथ दुर्व्यवहार करते हुए देखकर उन्हें शर्मिंदगी महसूस हुई। उन्होंने कहा कि एक वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी के लिए ऐसा बर्ताव बिल्कुल भी शोभा नहीं देता।

श्रीनगर में पत्रकारों से बात करते हुए डॉ. फारूक अब्दुल्ला ने कहा कि अधिकारी द्वारा इस्तेमाल की गई भाषा अस्वीकार्य है और यह एक आईएएस अधिकारी से अपेक्षित अनुशासन और पेशेवर रवैये की कमी को दर्शाती है।

उन्होंने कहा कि महिला अधिकारी के साथ उन्होंने जिस भाषा का इस्तेमाल किया वह बेहद अनुचित थी। उन्हें फटकार लगाई जानी चाहिए। इससे पता चलता है कि उनमें एक अधिकारी के लिए जरूरी शिष्टाचार और आचरण की कमी है। डॉ. फारूक ने कहा कि अधिकारियों की नियुक्ति जनता की सेवा करने, उनकी शिकायतों को सुनने और उनकी समस्याओं का समाधान करने के लिए की जाती है न कि उन्हें अपमानित करने या नीचा दिखाने के लिए।

उन्होंने कहा कि लोग अपनी शिकायतें बताना चाहते हैं और अधिकारियों को धैर्यपूर्वक उन्हें सुनना चाहिए। इसके बजाय, उन्होंने सीधे कहा, 'बाहर जाओ, बाहर जाओ।' यह पूरी तरह से गलत है। उन्हें जम्मू-कश्मीर से हटा दिया जाना चाहिए।

इस घटना पर नाराजगी जताते हुए अब्दुल्ला ने कहा कि आज जब मैंने सोशल मीडिया पर यह घटना देखी तो मुझे शर्मिंदगी महसूस हुई। उनका व्यवहार एक आईएएस अधिकारी के लिए बिल्कुल भी उचित नहीं था। उन्होंने पूरे प्रशासनिक समुदाय को शर्मिंदा कर दिया है।

जब उनसे पूछा गया कि क्या उनके मुख्यमंत्री कार्यकाल के दौरान ऐसी घटनाएं हुई थीं तो अब्दुल्ला ने कहा कि किसी भी अधिकारी या मंत्री को लोगों का अपमान करने का अधिकार नहीं है। उन्होंने कहा कि चाहे कोई अधिकारी हो या मंत्री, वे यहां लोगों की सेवा करने और उनकी कठिनाइयों को दूर करने के लिए हैं न कि उनका अपमान करने या उनके साथ बुरा बर्ताव करने के लिए।

मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के इस बयान का समर्थन करते हुए कि अगर जम्मू-कश्मीर का राज्य का दर्जा बरकरार रहता तो ऐसी घटना नहीं होती, फारूक अब्दुल्ला ने कहा कि अगर वे सत्ता में होते तो उस अधिकारी के खिलाफ और भी सख्त कार्रवाई करते। उन्होंने कहा कि उसे सिर्फ हटाया ही नहीं जाता बल्कि बाहर निकाल दिया जाता। अगर मैं पद पर होता तो वह जम्मू-कश्मीर में कुछ मिनटों से ज़्यादा नहीं टिक पाता। मैं उसे वापस विमान में बिठाकर रवाना कर देता। उन्होंने कहा कि यह घटना 2019 के बाद से जम्मू-कश्मीर के प्रशासनिक कामकाज में आए बदलावों को दर्शाती है।

दिल्ली में हो रहे विरोध प्रदर्शनों का स्वागत करते हुए अब्दुल्ला ने कहा कि जिसे उन्होंने 'तानाशाही' बताया उसके खिलाफ एक नई लहर उठ रही है। उन्होंने कहा कि मुझे लगता है कि ये विरोध प्रदर्शन बहुत अच्छे हैं। तानाशाही और हिटलर जैसी जीवनशैली के खिलाफ एक नई लहर शुरू हो रही है।

डॉ. फारूक ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से यह भी आग्रह किया कि वे विवादों को सुलझाने के लिए बातचीत और चर्चा को ही एकमात्र कारगर तरीका मानें।

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हिन्दुस्थान समाचार / बलवान सिंह

Livevns.news Desk
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