वेदों से दूरी बन रही दुखों का कारण, यज्ञ और सत्कर्म ही सच्चे सुख का मार्ग-योगाचार्य स्वामी राम स्वरूप
कठुआ, 21 अप्रैल (हि.स.)। वेद मंदिर में चल रहे 78 दिवसीय चारों वेदों पर आधारित यज्ञ के दौरान योगाचार्य स्वामी राम स्वरूप ने श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि पृथ्वी का निर्माण मानव सहित सभी जीवों को सुख देने के लिए हुआ है, न कि दुख के लिए।
उन्होंने ऋग्वेद के मंत्रों का उल्लेख करते हुए कहा कि यह संसार सभी जीवों के लिए सुखद जीवन का स्थान है लेकिन वर्तमान समय में मनुष्य वेदों के ज्ञान और सत्कर्मों से दूर हो गया है जिसके कारण दुख बढ़ रहे हैं। उन्होंने बताया कि यज्ञ जैसे पुण्य कर्म न केवल वातावरण को शुद्ध करते हैं बल्कि जीवन में सुख-शांति भी लाते हैं। स्वामी राम स्वरूप ने कहा कि वेद हमें सत्य, ज्ञान और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देते हैं। जो व्यक्ति इस मार्ग का अनुसरण करता है, वही सच्ची शांति और आनंद प्राप्त करता है।
उन्होंने लोगों से अपील की कि वे विद्वान आचार्यों के संपर्क में रहकर वेदों का ज्ञान प्राप्त करें और उसे अपने जीवन में अपनाएं। उन्होंने यह भी कहा कि आज हर व्यक्ति सुख चाहता है लेकिन वेदों द्वारा बताए गए अनुशासित जीवन को अपनाने से बचता है। जबकि सच्चा सुख केवल ईश्वर भक्ति, ज्ञान और अच्छे कर्मों से ही संभव है। अपने संबोधन में उन्होंने यजुर्वेद के मंत्रों का हवाला देते हुए कहा कि शुद्ध और कल्याणकारी धन भी यज्ञ और वेदों के अनुसार जीवन जीने से ही प्राप्त होता है। उन्होंने निष्कर्ष में कहा कि ईश्वर के नियमों के विरुद्ध चलकर कोई भी व्यक्ति सच्चा सुख प्राप्त नहीं कर सकता।
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हिन्दुस्थान समाचार / सचिन खजूरिया

