आंगनवाड़ी भर्ती से विस्थापित कश्मीरी पंडित महिलाओं का बहिष्कार गंभीर चिंता का विषय: जी.एल. रैना

WhatsApp Channel Join Now

जम्मु, 16 जनवरी (हि.स.)।

विस्थापित कश्मीरी पंडित समुदाय की योग्य और पात्र उम्मीदवारों को आंगनवाड़ी कार्यकर्ता (संगिनी) और सहायिका (सहायिका) पदों के लिए आवेदन करने से वंचित किए जाने से गहरी चिंता और दुख का माहौल है। जम्मू-कश्मीर केंद्र शासित प्रदेश के पूर्व विधान परिषद सदस्य और भाजपा प्रवक्ता गिरधारी लाल रैना ने केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती अन्नपूर्णा देवी को लिखे पत्र में इस मुद्दे को जोरदार तरीके से उठाया है।

रैना ने मंत्री का ध्यान जम्मू-कश्मीर के विभिन्न जिलों में आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं की भर्ती के लिए संबंधित अधिकारियों द्वारा हाल ही में जारी की गई अधिसूचनाओं की ओर आकर्षित करते हुए इस बात पर गहरी निराशा व्यक्त की कि समाज के एक अत्यंत योग्य और पात्र वर्ग को बिना किसी गलती के भर्ती प्रक्रिया से प्रभावी रूप से बाहर कर दिया गया है।

इस वंचित वर्ग में विस्थापित कश्मीरी पंडित समुदाय की महिलाएं शामिल हैं जिन्हें 1989-90 की दुखद घटनाओं के दौरान कश्मीर घाटी में उनके घरों से जबरन बेदखल कर दिया गया था। ये परिवार जम्मू-कश्मीर के राहत आयुक्त कार्यालय में कश्मीरी प्रवासी के रूप में विधिवत पंजीकृत हैं और वर्तमान में जम्मू और देश के अन्य हिस्सों में परिस्थितियों के तहत रह रहे हैं।

---------------

हिन्दुस्थान समाचार / रमेश गुप्ता

Share this story