बाबा जित्तो के इतिहास को सहेजने के लिए स्मारक, पुस्तकालय और कृषि विश्वविद्यालय की मांग

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जम्मू, 26 मार्च (हि.स.)। जम्मू क्षेत्र में शहीद किसान बाबा जित्तो को उचित सम्मान दिलाने की मांग एक बार फिर जोर पकड़ती नजर आ रही है। शहीद किसान बाबा जित्तो संघर्ष समिति ने आज सरकार के समक्ष इस मुद्दे को उठाते हुए कहा कि बाबा जित्तो का इतिहास आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा स्रोत है जिसे संरक्षित किया जाना बेहद आवश्यक है। समिति के अध्यक्ष प्रताप सिंह जम्वाल ने कहा कि बाबा जित्तो का जीवन इतिहास का एक महत्वपूर्ण अध्याय है लेकिन सरकार ने अब तक उनके बलिदान को वह मान्यता नहीं दी जिसके वह हकदार हैं। उन्होंने 15वीं सदी में किसानों के अधिकारों के लिए आवाज उठाई और अत्याचार के खिलाफ संघर्ष करते हुए अपना बलिदान दिया।

जम्वाल ने कहा कि वर्तमान में बाबा जित्तो को केवल उनके नाम पर लगने वाले मेले के माध्यम से याद किया जाता है, जो उत्तर भारत के सबसे बड़े मेलों में से एक है। इसके अलावा उनके नाम पर न तो कोई भव्य स्मारक है, न ही कोई पुस्तकालय और न ही कोई कृषि विश्वविद्यालय स्थापित किया गया है। उनका मानना है कि उनके सम्मान में एक कृषि विश्वविद्यालय का नाम रखा जाना चाहिए था।

उन्होंने आरोप लगाया कि पूर्व सरकारों ने जानबूझकर उनके ऐतिहासिक महत्व को नजरअंदाज किया। साथ ही उन्होंने भारतीय जनता पार्टी से अपील की कि वह अपने चुनावी घोषणापत्र में किए गए वादों को याद करते हुए इस मुद्दे को विधानसभा में उठाए और बाबा जित्तो के बलिदान को उचित सम्मान दिलाने के लिए ठोस कदम उठाए।

हिन्दुस्थान समाचार / राहुल शर्मा

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