पंजाबी को आधिकारिक भाषा का दर्जा देने की मांग, सिख समाज ने सरकार को दी आंदोलन तेज करने की चेतावनी
कठुआ, 05 अक्टूबर (हि.स.)। पंजाबी भाषा को जम्मू-कश्मीर में आधिकारिक भाषा का दर्जा देने की मांग को लेकर सोमवार को कठुआ में सिख समाज ने जोरदार प्रदर्शन किया। मुखर्जी चाैक स्थित गुरुद्वारा परिसर में बड़ी संख्या में सिख समुदाय के लोग एकत्रित हुए और सरकार के खिलाफ रोष जताते हुए पंजाबी भाषा को आधिकारिक दर्जा देने की मांग बुलंद की।
गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के अध्यक्ष चरणजीत सिंह भोला ने कहा कि पंजाबी भाषा को आधिकारिक भाषा की व्यवस्था से बाहर रखा जाना सिख समाज के साथ-साथ पंजाबी भाषा और विरासत की अनदेखी है। उन्होंने कहा कि महाराजा रणजीत सिंह से लेकर महाराजा हरि सिंह के शासनकाल तक पंजाबी भाषा का महत्वपूर्ण स्थान रहा है लेकिन बाद में इसे आधिकारिक भाषा के दर्जे से बाहर कर दिया गया।
उन्होंने कहा कि पंजाबी महज एक भाषा नहीं बल्कि सिख समाज की पहचान, संस्कृति, इतिहास और विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा है। भाषा को कमजोर करने का सीधा असर आने वाली पीढ़ियों पर पड़ेगा। उन्होंने सरकार से मांग की कि पंजाबी भाषा को स्कूलों और शैक्षणिक संस्थानों में बढ़ावा देने के साथ-साथ उसे जम्मू-कश्मीर में आधिकारिक भाषा का दर्जा दिया जाए।
चरणजीत सिंह ने कहा कि सरकार अब सिर्फ आश्वासन देने के बजाय पंजाबी को आधिकारिक भाषा का दर्जा देने के लिए ठोस निर्णय ले और प्रस्ताव पारित करे। उन्होंने बताया कि प्रदर्शन के बाद आने वाले दिनों में सिख समाज की ओर से उपायुक्त कठुआ को ज्ञापन सौंपकर अपनी मांग औपचारिक रूप से रखी जाएगी। उन्होंने सरकार को स्पष्ट चेतावनी देते हुए कहा कि यदि पंजाबी भाषा को आधिकारिक दर्जा देने की मांग को अनदेखा किया गया तो सिख समाज आंदोलन को और व्यापक एवं उग्र करने के लिए मजबूर होगा। उन्होंने कहा कि सरकार ने समय रहते मांग नहीं मानी तो आने वाले दिनों में बड़े स्तर पर विरोध-प्रदर्शन किए जाएंगे और इसकी पूरी जिम्मेदारी सरकार की होगी।
उन्होंने दोहराया कि पंजाबी भाषा के सम्मान और अधिकार के लिए सिख समाज पीछे नहीं हटेगा।
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हिन्दुस्थान समाचार / सचिन खजूरिया

