शासन के लिए विकेंद्रीकरण महत्वपूर्ण, जम्मू-कश्मीर में नए डिवीजनों की आवश्यकता: वहीद पारा

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जम्मू, 27 मार्च (हि.स.)। पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) के नेता वहीद-उर-रहमान पारा ने शुक्रवार को जम्मू-कश्मीर के प्रशासन में बड़े बदलाव की वकालत करते हुए कहा कि जमीनी स्तर पर शासन और विकेंद्रीकरण सुनिश्चित करने के लिए नए डिवीजनों और जिलों का गठन आवश्यक है।

पुलवामा से विधायक ने कहा कि ध्यान किसी राजनीतिक मकसद के बजाय प्रशासनिक दक्षता पर होना चाहिए और इस बात पर जोर दिया कि दूरदराज और सीमावर्ती क्षेत्रों में लोगों के करीब शासन संरचनाओं की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि यह जम्मू-कश्मीर को विभाजित करने का मामला नहीं है। उद्देश्य जमीनी स्तर पर शासन और विकेंद्रीकरण प्रदान करना है। उन्होंने कहा कि चिनाब एक ऐसा क्षेत्र है जो बहुत दूर है और समस्याओं से जूझ रहा है। अगर राजौरी में विभाजन होता है तो यह सभी के लिए फायदेमंद होगा।

उन्होंने दूरदराज के क्षेत्रों के निवासियों द्वारा सामना की जाने वाली कठिनाइयों को उजागर करते हुए कहा कि लोगों को वर्तमान में बुनियादी प्रशासनिक कार्यों के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ती है। उन्होंने कहा कि अगर हम सरकार का विकेंद्रीकरण करने में सक्षम हैं तो हमें ऐसा क्यों नहीं करना चाहिए। इससे पहुंच बढ़ेगी।

पीडीपी नेता ने चेनाब क्षेत्र और राजौरी के पीर पंचाल के लिए एक अलग डिवीजन बनाने का आह्वान किया। उन्होंने अश्मुकम सहित नए जिलों के गठन का भी सुझाव दिया ताकि यात्रा पर्यटन का समन्वय किया जा सके। उन्होंने बताया कि सोपोर, हंदवाडा और त्राल जैसे क्षेत्रों में पहले से ही पुलिस जिले हैं और वे पूर्ण प्रशासनिक दर्जा पाने के हकदार हैं।

विधायक पारा ने आगे कहा कि यदि परिसीमन आवश्यक हुआ तो विधायकों और लोकसभा सीटों की संख्या तदनुसार बढ़ाई जा सकती है। उन्होंने कहा कि यह चर्चा एक लंबी प्रक्रिया का हिस्सा है। उन्होंने कहा कि यह कोई घटना नहीं बल्कि एक प्रक्रिया है। हमने जम्मू और कश्मीर में प्रशासनिक विकेंद्रीकरण पर चर्चा शुरू कर दी है। इसका उद्देश्य सुशासन और जमीनी स्तर पर शासन प्रदान करना है।

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हिन्दुस्थान समाचार / सुमन लता

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