दार उल उलूम जामिया सिराज उल उलूम को यूएपीए के तहत गैरकानूनी घोषित करना वंचित वर्गों के साथ घोर अन्याय : महबूबा

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श्रीनगर, 27 अप्रैल (हि.स.)। पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने सोमवार को कहा कि जम्मू-कश्मीर के शोपियां में दार उल उलूम जामिया सिराज उल उलूम को यूएपीए के तहत गैरकानूनी इकाई घोषित करना समाज के वंचित वर्गों के लिए एक घोर अन्याय है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि राष्ट्र-विरोधी गतिविधि के किसी भी ठोस सबूत के बिना प्रतिबंध लगाना पूर्वाग्रह और गलत इरादे को दर्शाता है।

महबूबा ने कहा कि हर दिन जम्मू-कश्मीर सरकार मूकदर्शक और जम्मू-कश्मीर की पहचान और गरिमा पर क्रूर हमलों की डरपोक समर्थक के रूप में कार्य करती है। दार उल उलूम जामिया सिराज उल उलूम को यूएपीए के तहत एक गैरकानूनी इकाई घोषित करना समाज के गरीब वंचित वर्गों के साथ एक घोर अन्याय है। पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि यह संस्था महंगी स्कूली शिक्षा का खर्च वहन करने में असमर्थ छात्रों के लिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के प्रतीक के रूप में काम करती है। उन्होंने कहा कि इसने प्रतिष्ठित डॉक्टर और पेशेवर पैदा किए हैं, जिन्होंने समर्पण के साथ इस देश की सेवा की।

संभागीय आयुक्त कश्मीर अंशुल गर्ग ने शोपियां के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक के डोजियर के आधार पर दो पेज का आदेश जारी किया, जो दक्षिण कश्मीर में शोपियां जिले के इमाम साहिब में दारुल उलूम जामिया सिराजुल उलूम में कथित अवैध गतिविधियों की ओर इशारा करता है। गर्ग के 24 अप्रैल को जारी आदेश के अनुसार रिकॉर्ड पर विश्वसनीय इनपुट और सबूत थे जो जमात-ए-इस्लामी के साथ संस्था के निरंतर और गुप्त संबंधों को इंगित करते थे, जिसे भारत सरकार ने 2019 में प्रतिबंधित कर दिया था।

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हिन्दुस्थान समाचार / राधा पंडिता

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