कांग्रेस जनता का विश्वास जीतने में विफल रहने के कारण अराजकता चाहती है-सत शर्मा
अखनूर, 30 अक्टूबर (हि.स.)। जम्मू-कश्मीर भाजपा अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद सत शर्मा (सीए) ने घटते जनसमर्थन से हताश होकर देश में राजनीतिक अस्थिरता और अराजकता पैदा करने के प्रयास के लिए कांग्रेस पार्टी की कड़ी आलोचना की।
सत शर्मा और विधायक मोहन लाल भगत, जिला प्रभारी विनय गुप्ता, अध्यक्ष कुलदीप शर्मा और अन्य उपस्थित लोगों के साथ भाजपा की अखनूर जिला इकाई द्वारा लोकतंत्र बचाओ, अराजकता मिटाओ विषय पर आयोजित एक सभा को संबोधित किया।
गुरुद्वारा कमेटी के अध्यक्ष एस. गुरविंदर सिंह, एस. रशपाल सिंह, एस. जितेंद्र सिंह, एस. स्वर्ण सिंह, एस. अमरिक सिंह, पूर्व सरपंच विजय शर्मा, बबलू शर्मा, किशोरी शर्मा, वीरेंद्र कुमार, गुल्लू राम, बाबू राम और अन्य प्रमुख नागरिक इस अवसर पर उपस्थित थे।
सत शर्मा ने कहा कि कांग्रेस नेतृत्व विशेषकर राहुल गांधी, अपनी खोई हुई जमीन वापस पाने के लिए लगातार गलत सूचना, निराधार आरोपों और राजनीतिक टकराव का सहारा ले रहे हैं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सत्ता की लालसा को राष्ट्रीय हित से ऊपर रख रही है और संवैधानिक संस्थाओं में जनता के विश्वास को कमजोर करने का प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस लोकतांत्रिक संस्थाओं को मजबूत करने के बजाय जब भी उनका कामकाज उसके राजनीतिक हितों के अनुकूल नहीं होता तो बार-बार उन पर सवाल उठाती है।
मतदाता सूचियों के विशेष गहन संशोधन (एसआईआर) का जोरदार बचाव करते हुए सत शर्मा ने कहा कि सटीक, पारदर्शी और स्वच्छ मतदाता सूची बनाए रखना स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनावों के लिए मौलिक है।
उन्होंने सवाल उठाया कि कांग्रेस उस प्रक्रिया का विरोध क्यों कर रही है जिसका उद्देश्य प्रत्येक पात्र नागरिक के मतदान के अधिकार को सुनिश्चित करते हुए डुप्लिकेट, मृत, स्थानांतरित और अन्य अपात्र प्रविष्टियों की पहचान करना है। उन्होंने कहा कि क्या कांग्रेस को लगता है कि वह लोकतांत्रिक तरीकों से जनता का विश्वास नहीं जीत सकती और वोट हासिल नहीं कर सकती। उन्होंने पूछा कि मतदाता सूचियों की जांच होने पर वह असहज क्यों हो जाती है। क्या उसका राजनीतिक अस्तित्व संदिग्ध प्रविष्टियों और फर्जी मतदान पर निर्भर है।
सत शर्मा ने आगे बताया कि अतीत में कई बार मतदाता सूचियों का गहन संशोधन किया गया है जिसमें पिछली कांग्रेस सरकारों के दौरान भी शामिल है। ऐसे संशोधन 1952-56, 1957, 1961, 1965-66, 1983-84, 1987-89, 1992-95 और 2002-04 आदि अवधियों में हुए थे। उन्होंने कहा कि अतीत में एक वैध चुनावी प्रक्रिया के रूप में मान्यता प्राप्त प्रक्रिया को केवल इसलिए अचानक विवादास्पद नहीं बना देना चाहिए क्योंकि वर्तमान सरकार इसके कार्यान्वयन का समर्थन करती है।
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हिन्दुस्थान समाचार / सुमन लता

