मुख्यमंत्री ने विभागों को पूंजीगत व्यय में तेजी लाने और निधियों के समय पर उपयोग को सुनिश्चित करने के दिए निर्देश

WhatsApp Channel Join Now
मुख्यमंत्री ने विभागों को पूंजीगत व्यय में तेजी लाने और निधियों के समय पर उपयोग को सुनिश्चित करने के दिए निर्देश


श्रीनगर, 28 जुलाई (हि.स.)।

मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने आज यहां सिविल सचिवालय में पूंजीगत व्यय पर एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की और सभी विभागों को व्यय की गति में उल्लेखनीय तेजी लाने का निर्देश दिया। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि उपलब्ध निधियों का समय पर उपयोग अवसंरचना विकास, सार्वजनिक सेवा वितरण और सतत आर्थिक विकास के लिए महत्वपूर्ण है।

मुख्यमंत्री ने व्यय में पिछड़ रहे विभागों पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता पर बल दिया और वित्तीय वर्ष के अंतिम महीनों तक खर्च में देरी करने की प्रथा के प्रति आगाह किया।

मुख्यमंत्री ने बैठक को संबोधित करते हुए कहा कि धन होने के बावजूद उसे खर्च न करना अक्षमता है। इसे उचित ठहराना बहुत मुश्किल है। धन न होने का कारण बताना आसान है लेकिन जब निधियां उपलब्ध हों और उनका उपयोग न किया जाए तो इसे उचित ठहराना असंभव है।

उन्होंने कहा कि समीक्षा जानबूझकर वित्तीय चक्र के प्रारंभ में बुलाई गई न कि वर्ष के अंत में ताकि समय रहते सुधारात्मक उपाय किए जा सकें और विभाग शेष कार्य अवधि का प्रभावी ढंग से उपयोग कर सकें।

कश्मीर घाटी और जम्मू के मैदानी इलाकों दोनों में अभी भी पर्याप्त कार्य अवधि उपलब्ध है। पहले से जारी की गई धनराशि का उचित उपयोग न होने का कोई कारण नहीं होना चाहिए। प्रत्येक विभाग को इस पर विशेष ध्यान देना चाहिए।

बैठक में मंत्री सकीना इटू, जावेद अहमद राणा, जावेद अहमद डार और सतीश शर्मा उपस्थित थे।

मुख्य सचिव अटल दुल्लू, विद्युत विकास विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव, मुख्यमंत्री के अतिरिक्त मुख्य सचिव, पर्यटन विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव, लोक निर्माण विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव, वित्त विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव, सभी प्रशासनिक सचिव, बजट महानिदेशक, कोड महानिदेशक, विभागाध्यक्ष और अन्य वरिष्ठ अधिकारी बैठक में उपस्थित थे। बाहरी अधिकारियों ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से भाग लिया।

राज्यों को पूंजी निवेश हेतु विशेष सहायता के कार्यान्वयन की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने विभागों को योजना के अंतर्गत आवंटित धनराशि का पूर्ण उपयोग सुनिश्चित करने का निर्देश दिया और चेतावनी दी कि चालू वित्त वर्ष में अप्रयुक्त राशि से अगले वित्त वर्ष में जम्मू और कश्मीर के आवंटन में कमी आएगी।

उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि एसएएससीआई भाग-1 के अंतर्गत उपलब्ध प्रत्येक रुपये का उपयोग किया जाना चाहिए और विभागों को पात्र परियोजनाओं की पहचान करने का निर्देश दिया।

उन्होंने मंत्रियों को योजना के अंतर्गत सुधार-संबंधी लक्ष्यों की व्यक्तिगत रूप से पखवाड़े के आधार पर समीक्षा करने का भी निर्देश दिया ताकि जम्मू और कश्मीर एसएएससीआई के सुधार घटक के अंतर्गत अतिरिक्त वित्तीय सहायता के लिए पात्र हो सके।

उन्होंने कहा कि जितनी जल्दी हम निर्दिष्ट सुधारों को लागू करेंगे उतनी ही जल्दी हमें अतिरिक्त धनराशि प्राप्त होगी और हमारे पास उसका उत्पादक रूप से उपयोग करने के लिए उतना ही अधिक समय होगा।

मुख्यमंत्री ने विभागों से उन परियोजनाओं पर तुरंत काम शुरू करने को कहा जिनकी प्रशासनिक स्वीकृति और निविदा प्रक्रिया पहले ही पूरी हो चुकी है। उन्होंने कहा कि ऐसी परियोजनाओं को प्रारंभ में पूंजीगत व्यय बजट के माध्यम से वित्त पोषित किया जा सकता है और अतिरिक्त धनराशि उपलब्ध होने पर उन्हें एसएएससीआई के सुधार-संबंधी घटक में स्थानांतरित किया जा सकता है।

उन्होंने विभागों को निर्देश दिया कि वे विकास कार्यों की पहचान करने से पहले निधि का इंतजार करने के बजाय अगले वित्तीय वर्ष के लिए परियोजनाओं की एक मजबूत योजना तैयार करें।

वित्तीय संसाधनों की उपलब्धता के बावजूद कुछ विभागों द्वारा परियोजनाओं की पहचान करने में असमर्थता पर चिंता व्यक्त करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार की चुनौती अब निधि की कमी से हटकर अपर्याप्त परियोजना तैयारियों की ओर मुड़ गई है।

उन्होंने विभागों को बजट परामर्श के दौरान विधानसभा सदस्यों द्वारा प्रस्तुत विकास प्राथमिकताओं की समीक्षा करने और प्रस्तावों, विशेष रूप से 2 करोड़ रुपये से अधिक की परियोजनाओं को, भविष्य में एसएएससीआई निधि के तहत शामिल करने के लिए उपयोग करने की सलाह दी।

हिन्दुस्थान समाचार / बलवान सिंह

Share this story