(0अपडेट) सीआईके ने कश्मीर में 22 जगहों पर की छापेमारी, 22 लोग हिरासत में
श्रीनगर, 7 जनवरी (हि.स.)। संगठित साइबर अपराध और आतंकवाद वित्तपोषण से इसके भयावह संबंधों पर करारा प्रहार करते हुए काउंटर इंटेलिजेंस कश्मीर (सीआईके) ने साइबर धोखाधड़ी, अवैध ऑनलाइन गेमिंग, सट्टेबाजी रैकेट और अन्य गैरकानूनी गतिविधियों से प्राप्त धन को आतंकवाद के लिए संचालित होने वाले एक व्यापक आपराधिक नेटवर्क पर अपनी कार्रवाई तेज कर दी है।
सीआईके द्वारा जारी एक बयान के अनुसार विश्वसनीय और विशिष्ट खुफिया जानकारी के आधार पर सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की धारा 66 (सी) और 66 (डी) के तहत एफआईआर संख्या 06/2025 दर्ज की गई है। भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 303, 308, 314, 316 (2), 318 (4), 336 (3), 340 (2) और 61 (2) तथा गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम, 1967 की धारा 13 के तहत कश्मीर के काउंटर इंटेलिजेंस पुलिस स्टेशन में मामला दर्ज किया गया है। इससे एक परिष्कृत और सुस्थापित वित्तीय अपराध गिरोह का पर्दाफाश हुआ है जो राष्ट्रीय आर्थिक सुरक्षा और डिजिटल सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा पैदा करता है।
अब तक की जांच से एक सुनियोजित साजिश का खुलासा हुआ है जिसमें आरोपियों ने स्थानीय और बाहरी गुर्गों के साथ मिलकर निर्दाेष, कमजोर और आर्थिक रूप से अक्षम व्यक्तियों के बैंक खातों का दुरुपयोग किया और उन्हें ‘खर्च के खातों’ में परिवर्तित कर दिया।
सीआईके ने कहा कि इन खातों का इस्तेमाल साइबर धोखाधड़ी और ऑनलाइन घोटालों, प्रतिबंधित ऑनलाइन गेमिंग और सट्टेबाजी प्लेटफॉर्म, फर्जी निवेश और ट्रेडिंग एप्लिकेशन से उत्पन्न भारी मात्रा में अवैध धन को अस्थायी माध्यम के रूप में किया जाता था। इसमें कहा गया है, ‘चिंताजनक रूप से अवैध रूप से अर्जित धन को आतंकवाद के वित्तपोषण और राष्ट्र की संप्रभुता और अखंडता के लिए हानिकारक अन्य गतिविधियों में लगाया गया था।’ यह गिरोह बैंकिंग नियमों का घोर उल्लंघन, केवाईसी प्रक्रियाओं का दुरुपयोग, उदयम पोर्टल पर गैर-मौजूद व्यावसायिक प्रतिष्ठानों का पंजीकरण (जिसका बाद में खातों को खोलने, वर्चुअल खाता संख्या आवंटित करने, पहचान की चोरी, प्रतिरूपण और जटिल मनी लॉन्ड्रिंग तकनीकों का उपयोग करके काम करता था जिनका उद्देश्य आपराधिक आय के स्रोत और गंतव्य को छिपाना था।
घाटी भर में व्यापक सीआईके अभियान प्रारंभिक जांच के दौरान कश्मीर डिवीजन में सक्रिय 22 संदिग्धों की पहचान की गई। श्रीनगर स्थित विशेष एनआईए न्यायालय से तलाशी वारंट प्राप्त करने के बाद सीआईके ने एक साथ 22 स्थानों पर तलाशी अभियान चलाया (श्रीनगर जिले में 17 स्थान, बडगाम जिले में 3 स्थान, शोपियां और कुलगाम जिलों में 1-1 स्थान)। तलाशी अभियान के परिणामस्वरूप जांच के लिए महत्वपूर्ण डिजिटल उपकरणों और वित्तीय अभिलेखों सहित बड़ी मात्रा में आपत्तिजनक सामग्री जब्त की गई।
अब तक 22 व्यक्तियों को हिरासत में लेकर साइबर धोखाधड़ी, अवैध ऑनलाइन गेमिंग, सट्टेबाजी प्लेटफॉर्म और संदिग्ध वित्तीय लेनदेन में उनकी सटीक भूमिका और संबंधों का पता लगाने के लिए पूछताछ की जा रही है। जांच अभी शुरुआती चरण में है, और जुटाए गए सबूतों से जम्मू-कश्मीर केंद्र शासित प्रदेश और देश के अन्य हिस्सों में फैले एक व्यापक नेटवर्क की पहचान करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
काउंटर इंटेलिजेंस कश्मीर का दृढ़ संदेश काउंटर इंटेलिजेंस कश्मीर संगठित आपराधिक गिरोहों को ध्वस्त करने, उनकी वित्तीय गतिविधियों को बाधित करने और राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरे में डालने वाले सभी आर्थिक अपराधों और गतिविधियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने के अपने अटूट संकल्प की पुष्टि करता है। बैंकिंग प्रणालियों का दुरुपयोग करने वालों को - चाहे जानबूझकर या अनजाने में सख्त कानूनी परिणामों का सामना करना पड़ेगा। उन्होंने जनता से आग्रह किया कि वे सतर्क रहें, अपने वित्तीय दस्तावेजों की सुरक्षा करें और किसी भी संदिग्ध प्रस्ताव या लेनदेन की सूचना अधिकारियों को दें। साइबर क्षेत्र में अपराध का कोई शिकार नहीं होता - यह संगठित अपराध और आतंकवाद को बढ़ावा देता है। सीआईके राष्ट्र की वित्तीय और डिजिटल अखंडता की रक्षा के लिए दृढ़ संकल्पित है।
हिन्दुस्थान समाचार / बलवान सिंह

