बाल श्रम और भिक्षावृत्ति-एक गंभीर सामाजिक चुनौती (लेखिका पूनम झा)

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बाल श्रम और भिक्षावृत्ति-एक गंभीर सामाजिक चुनौती (लेखिका पूनम झा)


कठुआ, 03 जुलाई (हि.स.)। बाल श्रम केवल एक सामाजिक समस्या नहीं बल्कि मानवता पर एक गंभीर प्रश्नचिह्न है। हर वर्ष बाल श्रम दिवस के अवसर पर देशभर में जागरूकता अभियान चलाए जाते हैं परंतु यह प्रयास केवल एक दिन तक सीमित नहीं रहने चाहिए। बच्चों के अधिकारों की रक्षा के लिए निरंतर और सामूहिक प्रयास आवश्यक हैं।

सरकार द्वारा निःशुल्क शिक्षा, मध्याह्न भोजन, पुस्तकें और स्कूल ड्रेस जैसी अनेक योजनाएँ चलाई जा रही हैं जिनसे बच्चों को स्कूल जाने के लिए प्रोत्साहन मिला है और बाल श्रम में कुछ कमी भी आई है। बावजूद इसके यह समस्या पूरी तरह समाप्त नहीं हो पाई है। एक और चिंताजनक पहलू है बच्चों से भिक्षावृत्ति कराना। अक्सर देखा जाता है कि छोटे-छोटे बच्चों को गोद में लेकर या सड़क किनारे बैठाकर भीख मंगवाई जाती है। यह न केवल बच्चों का शोषण है बल्कि उनके मौलिक अधिकारों का सीधा उल्लंघन भी है। तपती धूप, बारिश और कड़ाके की ठंड में इन मासूमों को सड़कों पर बैठाना अत्यंत अमानवीय है। ऐसी स्थिति में हमें अपनी सोच बदलने की आवश्यकता है। बच्चों को पैसे देने के बजाय उनकी शिक्षा, सुरक्षा और पुनर्वास के लिए प्रयास करना चाहिए। समाजसेवियों, प्रशासन और आम नागरिकों को मिलकर यह सुनिश्चित करना होगा कि कोई भी बच्चा इस कुप्रथा का शिकार न बने।

जब अभिभावक अपनी जिम्मेदारियों से पीछे हट जाते हैं तब समाज का कर्तव्य और भी बढ़ जाता है। बच्चों को यह समझ नहीं होती कि उनके साथ क्या हो रहा है इसलिए उन्हें इस शोषण से बचाना हमारा नैतिक दायित्व है। इसके साथ ही आम नागरिकों को भी जागरूक होना होगा। कई बार हमारी सहानुभूति ही ऐसे लोगों को बढ़ावा देती है जो बच्चों का इस्तेमाल कर भीख मांगते हैं। यदि किसी को सहायता की आवश्यकता है तो उसे भोजन, शिक्षा, रोजगार या सरकारी योजनाओं की जानकारी देकर मदद करना अधिक उचित है। हमें यह समझना होगा कि बच्चे का स्थान सड़क नहीं बल्कि विद्यालय है। उनका बचपन भीख या मजदूरी में नहीं बल्कि शिक्षा, सपनों और उज्ज्वल भविष्य के निर्माण में बीतना चाहिए। आइए हम सभी मिलकर संकल्प लें कि बाल श्रम और भिक्षावृत्ति जैसी कुप्रथाओं के खिलाफ आवाज उठाएँगे और हर बच्चे को शिक्षा, सुरक्षा और सम्मानजनक जीवन दिलाने में अपना योगदान देंगे।

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हिन्दुस्थान समाचार / सचिन खजूरिया

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