मुख्य सचिव ने जम्मू-कश्मीर में प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल एवं शिक्षा के ढांचे की समीक्षा की

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जम्मू, 22 फ़रवरी (हि.स.)।

मुख्य सचिव अटल दुल्लू ने समाज कल्याण विभाग द्वारा प्रस्तावित प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल एवं शिक्षा संबंधी उपायों का आकलन करने के लिए सभी हितधारकों की बैठक की।

इस बैठक में उन्होंने जम्मू-कश्मीर में आंगनवाड़ी केंद्रों को समग्र बाल विकास के जीवंत केंद्रों में बदलने के लिए समयबद्ध, परिणामोन्मुखी समग्र सरकारी दृष्टिकोण अपनाने का आह्वान किया।

बैठक में सरकारी विभाग के आयुक्त सचिव; समाज कल्याण आयुक्त सचिव; समग्र शिक्षा परियोजना निदेशक; मिशन पोषण के निदेशक; जम्मू-कश्मीर शिक्षा मंत्रालय के निदेशक; जम्मू/कश्मीर स्कूल शिक्षा निदेशक; और संबंधित विभागों के अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

राष्ट्रीय शिक्षा नीति और 'विकसित भारत' की परिकल्पना के आलोक में प्रारंभिक बाल्यावस्था विकास की परिवर्तनकारी भूमिका पर प्रकाश डालते हुए मुख्य सचिव ने कहा कि कोई भी राष्ट्र अपने बच्चों में उत्पादक निवेश किए बिना सतत विकास का सपना नहीं देख सकता।

उन्होंने बच्चों को समृद्ध भविष्य की गारंटी और किसी भी राष्ट्र की वास्तविक संपत्ति बताया। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि प्रचुर प्राकृतिक संसाधनों से संपन्न राष्ट्र भी अंततः उत्पादकता और विकास के लिए अपने मानव संसाधनों की गुणवत्ता पर निर्भर होते हैं और उन्होंने कहा कि गुणवत्तापूर्ण मानव पूंजी के निर्माण का सबसे अच्छा तरीका समयबद्ध और रणनीतिक प्रारंभिक बाल्यावस्था हस्तक्षेप ही है।

लक्ष्यों की स्पष्टता और समय-सीमा के पालन पर बल देते हुए उन्होंने सभी विभागों को पोषण, विद्यालय जाने की तैयारी और मूलभूत शिक्षा परिणामों में उल्लेखनीय सुधार प्राप्त करने के लिए निकट समन्वय में कार्य करने का निर्देश दिया।

समाज कल्याण विभाग के आयुक्त सरमद हाफ़िज़ ने इस अवसर पर बताया कि केंद्र शासित प्रदेश में 28,190 आंगनवाड़ी केंद्रों के माध्यम से प्रारंभिक बाल्यावस्था शिक्षा सेवाएं प्रदान की जा रही हैं जिनमें पूर्व-शिक्षा (3-6 वर्ष), पूरक पोषण, टीकाकरण, विकास निगरानी, विकासात्मक विलंब की प्रारंभिक पहचान और दिव्यांग बच्चों के लिए समावेशी सेवाएं शामिल हैं।

उन्होंने आगे कहा कि शिक्षण ढांचा नवचेतना (0-3 वर्ष) और आधारशिला (3-6 वर्ष) पर आधारित है, जो संज्ञानात्मक शिक्षा, भाषा, सामाजिक-भावनात्मक, शारीरिक और सांस्कृतिक विकास जैसे पांच विकासात्मक क्षेत्रों में खेल-आधारित और गतिविधि-उन्मुख शिक्षा को बढ़ावा देता है।

प्रारंभिक बाल्यावस्था शिक्षा (ईसीई) के रोडमैप के तहत प्रस्तावित हस्तक्षेपों पर प्रकाश डालते हुए, पोषण के एमडी, सज्जाद हुसैन गनई ने बैठक को सूचित किया कि रोडमैप का एक प्रमुख स्तंभ अंतर-विभागीय समन्वय पर आधारित है। उन्होंने विस्तार से बताया कि स्वास्थ्य विभाग के साथ, महिला एवं बाल्यावस्था कार्यकर्ताओं और आशा कार्यकर्ताओं के लिए एकीकृत गृह-यात्रा प्रोटोकॉल, प्रारंभिक बाल्यावस्था विकास केंद्रित ग्राम स्वास्थ्य, स्वच्छता और पोषण दिवस सह-परामर्श सत्र और विकासात्मक विलंब स्क्रीनिंग तंत्र को संस्थागत रूप दिया गया है।

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हिन्दुस्थान समाचार / रमेश गुप्ता

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