एनईईटी परीक्षा उत्तीर्ण छात्रों को मेडिकल कॉलेज में समायोजित करना सरकार की जिम्मेदारी : अब्दुल्ला

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- मुख्यमंत्री ने माता वैष्णो देवी संस्थान में एमबीबीएस कोर्स बंद करने के फैसले की आलोचना की

जम्मू, 08 जनवरी (हि.स.)। जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने गुरुवार को श्री माता वैष्णो देवी इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एक्सीलेंस को एमबीबीएस पाठ्यक्रम संचालित करने की अनुमति वापस लेने के फैसले की आलोचना की है। उन्होंने कहा कि एनईईटी परीक्षा उत्तीर्ण छात्रों को राज्य के मेडिकल कॉलेज में समायोजित करना सरकार की जिम्मेदारी है।

अब्दुल्ला ने संवाददाताओं से कहा कि छात्रों ने एनईईटी परीक्षा उत्तीर्ण की है और उनके पास योग्यता है। इसलिए यह राज्य की जिम्मेदारी है कि व्यवधान को कम करने के लिए उन्हें उनके घरों के पास एक मेडिकल कॉलेज में समायोजित किया जाए। अब उन्हें समायोजित करना हमारी जिम्मेदारी है और हम उन्हें उनके घरों के पास एक मेडिकल कॉलेज में समायोजित करेंगे, ताकि वे प्रभावित न हों। हमें इस मेडिकल कॉलेज को बंद करके छात्रों के साथ किए गए अन्याय के बारे में सोचने की जरूरत है। पूरे देश में लोग मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश के लिए संघर्ष कर रहे हैं। पूरे देश में जम्मू-कश्मीर ऐसा केंद्र शासित प्रदेश है, जहां पूरी तरह कार्यात्मक मेडिकल कॉलेज बंद कर दिया गया है।

राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग के मेडिकल मूल्यांकन और रेटिंग बोर्ड (एमएआरबी) ने शैक्षणिक वर्ष 2025-26 के लिए 50 सीटों के साथ एमबीबीएस पाठ्यक्रम चलाने के लिए श्री माता वैष्णो देवी इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एक्सीलेंस, ककरयाल, रियासी (जम्मू और कश्मीर) को दी गई अनुमति को वापस ले लिया था। एनएमसी अधिकारियों ने कहा कि 6 जनवरी को लिया गया यह निर्णय तत्काल प्रभाव से लागू हुआ और एक औचक निरीक्षण के दौरान न्यूनतम मानकों का अनुपालन न करने के बारे में गंभीर निष्कर्ष सामने आए।

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हिन्दुस्थान समाचार / बलवान सिंह

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