भारत के मुख्य न्यायाधीश ने लेह में जम्मू-कश्मीर और लद्दाख उच्च न्यायालय की लद्दाख बेंच का किया उद्घाटन

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लद्दाख, 18 अक्टूबर (हि.स.)। केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख में न्याय प्रशासन के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि के रूप में भारत के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने आज लेह के मेलोंगथांग में जम्मू-कश्मीर और लद्दाख उच्च न्यायालय की नवस्थापित लद्दाख बेंच का उद्घाटन किया। इस बेंच की स्थापना लद्दाख के लोगों विशेष रूप से दूरदराज और दुर्गम क्षेत्रों में रहने वालों के लिए न्याय को सुलभ बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जिससे न्यायिक कार्यवाही के लिए श्रीनगर या जम्मू की यात्रा में लगने वाली कठिनाइयों, समय और खर्च में कमी आएगी।

इस अवसर पर भारत के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत, भारत के सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश न्यायमूर्ति एम. एम. सुंदरेश, न्यायमूर्ति पी. एस. नरसिम्हा और न्यायमूर्ति अरुण पल्ली, भारत के अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरामानी, लद्दाख के उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश डॉ. न्यायमूर्ति पुष्पेंद्र सिंह भाटी उपस्थित रहे।

उच्च न्यायालय के न्यायाधीश न्यायमूर्ति संजीव कुमार, न्यायमूर्ति सिंधु शर्मा और न्यायमूर्ति रजनेश ओसवाल और लद्दाख केंद्र शासित प्रदेश के मुख्य सचिव आशीष कुमार कुंद्रा भी उपस्थित रहे।

इस अवसर पर जम्मू-कश्मीर और लद्दाख उच्च न्यायालय के पूर्व मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति ताशी राबस्तान, उच्च न्यायालय के सभी न्यायाधीश अपने जीवनसाथियों के साथ, पुलिस महानिदेशक, विधि सचिव, प्रशासनिक सचिव और लद्दाख केंद्र शासित प्रदेश की सेना, नागरिक प्रशासन, पुलिस और अन्य विभागों के वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे।

रजिस्ट्रार जनरल एम. के. शर्मा के नेतृत्व में उच्च न्यायालय रजिस्ट्री के अधिकारी, भारत के अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल, भारत के उप सॉलिसिटर जनरल और लेह और कारगिल बार एसोसिएशन के अध्यक्ष भी समारोह में शामिल हुए।

भारत के मुख्य न्यायाधीश के आगमन पर उन्हें औपचारिक गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया जिसके बाद उन्होंने उद्घाटन पट्टिका का अनावरण किया।

औपचारिक कार्यवाही राष्ट्रगान और राष्ट्रीय गीत के साथ शुरू हुई जिसके बाद जम्मू-कश्मीर और लद्दाख उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश डॉ. न्यायमूर्ति पुष्पेंद्र सिंह भाटी ने स्वागत भाषण दिया।

अपने संबोधन में डॉ न्यायमूर्ति पुष्पेंद्र सिंह भाटी ने इस बात पर जोर दिया कि न्याय तक पहुंच लद्दाख पीठ की स्थापना का मार्गदर्शक सिद्धांत रहा है। उन्होंने कहा कि भारत के मुख्य न्यायाधीश के दूरदर्शी नेतृत्व में विश्व के सबसे ऊंचे क्षेत्रों में से एक में संवैधानिक न्यायालय की स्थापना, न्याय को लोगों के करीब लाने की दिशा में एक ऐतिहासिक मील का पत्थर है विशेष रूप से लद्दाख के दूरस्थ और भौगोलिक रूप से चुनौतीपूर्ण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के लिए।

भारत के मुख्य न्यायाधीश ने पर्यावरण संरक्षण के प्रति न्यायपालिका की प्रतिबद्धता का प्रतीक ग्रीन वॉल का वर्चुअल उद्घाटन भी किया। इस पहल के उपलक्ष्य में गणमान्य व्यक्तियों को पौधे भेंट किए गए और एक लघु वीडियो दिखाया गया।

अपने विशेष संबोधन में लद्दाख के उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना ने लद्दाख पीठ की स्थापना को इस क्षेत्र में न्याय तक पहुंच को मजबूत करने की दिशा में एक ऐतिहासिक मील का पत्थर बताया। उन्होंने लद्दाख में पर्यावरण संरक्षण और पारिस्थितिक स्थिरता को बढ़ावा देने में ग्रीन वॉल पहल के महत्व पर भी प्रकाश डाला।

इस अवसर पर भारत के सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश न्यायमूर्ति एम. एम. सुंदरेश, न्यायमूर्ति पी. एस. नरसिम्हा और न्यायमूर्ति अरुण पल्ली तथा भारत के अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरामानी ने भी सभा को संबोधित किया।

समारोह का एक प्रमुख आकर्षण भारत के मुख्य न्यायाधीश द्वारा चार महत्वपूर्ण पहलों का शुभारंभ था जिनमें ग्रीन वॉल और डिजिटल पहलें शामिल हैं। लद्दाख बेंच के लिए ई-फाइलिंग पोर्टल और दस्तावेज़ प्रबंधन प्रणाली तथा उच्च न्यायालय का ऑनलाइन भर्ती पोर्टल। ई-फाइलिंग पोर्टल अधिवक्ताओं और वादियों विशेष रूप से दूरस्थ क्षेत्रों के लोगों को न्यायालय आए बिना इलेक्ट्रॉनिक रूप से मामले दर्ज करने में सक्षम बनाएगा जबकि डीएमएस न्यायिक अभिलेखों के डिजिटल प्रबंधन को सुगम बनाएगा। ऑनलाइन भर्ती पोर्टल उच्च न्यायालय और जिला न्यायपालिका में भर्ती प्रक्रिया को सुव्यवस्थित करेगा जिससे पारदर्शिता, सुगमता और दक्षता को बढ़ावा मिलेगा।

महत्वपूर्ण रूप से लद्दाख बेंच आधुनिक डिजिटल अवसंरचना से सुसज्जित, पूरी तरह से आईटी-सक्षम, कागज रहित न्यायालय के रूप में कार्य करेगा। न्यायालय परिसर में एक समर्पित डिजिटलीकरण केंद्र, फाइलिंग काउंटर, बार रूम, याचिकाकर्ताओं के बैठने का क्षेत्र, सम्मेलन कक्ष और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग कक्ष भी हैं जो कुशल और प्रौद्योगिकी-आधारित न्यायिक कार्यप्रणाली सुनिश्चित करते हैं।

भारत के मुख्य न्यायाधीश ने 11 स्थानों पर सौर ऊर्जा प्रणालियों की स्थापना का कार्य भी प्रारंभ किया जो नवीकरणीय ऊर्जा और टिकाऊ अवसंरचना के प्रति न्यायपालिका की प्रतिबद्धता को सुदृढ़ करता है।

अपने अध्यक्षीय भाषण में भारत के मुख्य न्यायाधीश ने लद्दाख में न्याय तक पहुंच सुनिश्चित करने में प्रौद्योगिकी और कानूनी सहायता की भूमिका पर जोर दिया और भौगोलिक बाधाओं को दूर करने के लिए शुरू की गई ई-पहल की सराहना की।

कार्यक्रम का समापन लद्दाख केंद्र शासित प्रदेश के मुख्य सचिव आशीष कुमार कुंद्रा द्वारा धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ जिसके बाद राष्ट्रगान गाया गया।

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हिन्दुस्थान समाचार / बलवान सिंह

Livevns.news Desk
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