कृषि विभाग में जाली नियुक्ति पत्रों के इस्तेमाल से जुड़े एक मामले में दो व्यक्तियों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल
श्रीनगर, 01 जनवरी (हि.स.)। कश्मीर अपराध शाखा (सीबीके) की आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) ने कृषि विभाग में जाली नियुक्ति पत्रों के इस्तेमाल से जुड़े एक मामले में दो व्यक्तियों के खिलाफ बडगाम जिले के चदूरा स्थित न्यायिक मजिस्ट्रेट के समक्ष आरोपपत्र दाखिल किया है। आरोप है कि इन जाली नियुक्ति पत्रों का इस्तेमाल सरकारी नौकरी के इच्छुक उम्मीदवारों को धोखा देने के उद्देश्य से किया गया था।
अधिकारियों ने बताया कि भारतीय दंड संहिता की धारा 420, 511, 467, 468, 471 और 120-बी के तहत दर्ज एफआईआर संख्या 43/2021 के संबंध में आरोपपत्र दाखिल किया गया है। आरोपियों की पहचान शौकत अहमद हाजम पुत्र मोहम्मद अकबर हाजम निवासी वागूरा चदूरा तहसील, बडगाम जिला और इरशाद अहमद अहंगर पुत्र गुलाम मोहम्मद अहंगर निवासी रत्नीपोरा पुलवामा जिला के रूप में हुई है। यह मामला कृषि उप निदेशक की शिकायत से शुरू हुआ जिन्होंने बताया कि एक महिला ने फर्जी और अमान्य नियुक्ति पत्र के आधार पर कृषि निदेशालय में शामिल होने का प्रयास किया था। शिकायत के अनुसार महिला 30 नवंबर, 2019 को कार्यालय में आई थी और अपने साथ 22 नवंबर, 2019 की एक कथित आधिकारिक सूचना की फोटोकॉपी लाई थी। बाद में सत्यापन से पता चला कि यह सूचना फर्जी थी और निदेशालय द्वारा जारी नहीं की गई थी।
आगे की जांच में पता चला कि दस्तावेज़ में उल्लिखित नियुक्ति आदेश - आदेश संख्या 385/स्थापना 2019 दिनांक 26 अप्रैल, 2019 और आदेश संख्या 16/स्थापना 2019 दिनांक 29 जनवरी, 2019 भी जाली थे। जांच के दौरान यह स्थापित हुआ कि इरशाद अहमद अहंगर ने सह-आरोपी शौकत अहमद हाजम से फर्जी पत्र प्राप्त किए थे। जांचकर्ताओं ने बताया कि जाली दस्तावेज़ में तीन व्यक्तियों को कश्मीर डिवीजन के कृषि विभाग में अर्दली के रूप में चयनित या नियुक्त दिखाया गया था।
जाली आदेश के आधार पर पुलवामा जिले के पठान क्षेत्र की एक महिला को कथित तौर पर यह विश्वास दिलाया गया कि उसकी नियुक्ति वैध रूप से हुई है और उसने उसी दिन श्रीनगर स्थित कृषि विभाग में कार्यभार ग्रहण करने का प्रयास किया। जांच में आगे यह भी पता चला कि आरोपियों ने नौकरी के इच्छुक उम्मीदवारों को धोखा देने के इरादे से जाली नियुक्ति आदेश तैयार करने और उनका उपयोग करने के लिए आपराधिक साजिश रची थी। हालांकि किसी भी प्रकार के मौद्रिक लेन-देन या अनुचित लाभ या हानि का प्रमाण नहीं मिल सका, फिर भी इस कृत्य को आईपीसी की धारा 511 के तहत धोखाधड़ी का प्रयास माना गया।
जांच पूरी होने के बाद ईओडब्ल्यू ने न्यायिक निर्णय के लिए सक्षम न्यायालय के समक्ष आरोप पत्र प्रस्तुत कर दिया है।
हिन्दुस्थान समाचार / बलवान सिंह

