जनगणना 2027 में संस्कृत को अपनाने का आह्वान

WhatsApp Channel Join Now
जनगणना 2027 में संस्कृत को अपनाने का आह्वान


जम्मू, 29 मई (हि.स.)। श्री कैलख ज्योतिष अविम वैदिक संस्थान ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत रोहित शास्त्री ने देशवासियों से वर्ष 2027 की जनगणना में भाषा के रूप में संस्कृत का उल्लेख करने का आह्वान किया है। उन्होंने कहा कि जनगणना केवल जनसंख्या की गणना का माध्यम नहीं बल्कि देश की सांस्कृतिक, भाषिक और सामाजिक पहचान का महत्वपूर्ण आधार भी है। महंत रोहित शास्त्री ने कहा कि भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा, वैदिक संस्कृति और देववाणी संस्कृत देश की अमूल्य धरोहर हैं जिनका संरक्षण और संवर्धन प्रत्येक भारतीय का दायित्व है। उन्होंने कहा कि संस्कृत केवल किसी एक वर्ग या परंपरा की भाषा नहीं बल्कि संपूर्ण भारतीय संस्कृति की आत्मा है।

उन्होंने कहा कि वेद, उपनिषद, रामायण, महाभारत, गीता, आयुर्वेद, योग, ज्योतिष तथा भारतीय दर्शन और वैज्ञानिक परंपराओं का मूल स्रोत संस्कृत भाषा ही है। यदि देश को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से मजबूत बनाए रखना है तो संस्कृत के प्रति सामाजिक जागरूकता और व्यवहारिक स्वीकार्यता बढ़ाना अत्यंत आवश्यक है। महंत रोहित शास्त्री ने नागरिकों से अपील करते हुए कहा कि जब वर्ष 2027 की जनगणना के दौरान अधिकारी घर-घर जानकारी लेने आएं तब भाषा संबंधी विवरण में निःसंकोच संस्कृत का उल्लेख करें। उन्होंने कहा कि “मम भाषा संस्कृतम्” तथा “अस्माकं भाषा संस्कृतम्” कहकर प्रत्येक नागरिक संस्कृत संरक्षण के राष्ट्रीय अभियान में अपनी सहभागिता सुनिश्चित कर सकता है।

उन्होंने कहा कि जनगणना में संस्कृत का व्यापक उल्लेख केवल भाषा की संख्या बढ़ाने का विषय नहीं है बल्कि यह भारत की सांस्कृतिक अस्मिता, आध्यात्मिक परंपरा और ज्ञान-विज्ञान की गौरवशाली विरासत को मजबूत करने का माध्यम बनेगा। इससे आने वाली पीढ़ियों में संस्कृत के प्रति सम्मान, अध्ययन और व्यवहारिक उपयोग की भावना भी विकसित होगी।

महंत रोहित शास्त्री ने कहा कि वर्तमान समय में विश्वभर में भारतीय संस्कृति, योग, आयुर्वेद और सनातन ज्ञान के प्रति आकर्षण लगातार बढ़ रहा है। ऐसे समय में संस्कृत भाषा का पुनर्जागरण भारत के सांस्कृतिक नेतृत्व को और अधिक सुदृढ़ करेगा। उन्होंने कहा कि संस्कृत केवल अतीत की भाषा नहीं, बल्कि भारत के भविष्य की सांस्कृतिक चेतना और राष्ट्रीय एकात्मता का भी आधार है। उन्होंने जानकारी दी कि श्री कैलख ज्योतिष एविम वैदिक संस्थान ट्रस्ट आने वाले समय में जनगणना 2027 को लेकर संस्कृत जागरण हेतु विभिन्न सामाजिक, धार्मिक और शैक्षणिक कार्यक्रम आयोजित करेगा, ताकि अधिक से अधिक लोग संस्कृत के महत्व को समझें और जनगणना में उसका उल्लेख करने के लिए प्रेरित हों।

अंत में महंत रोहित शास्त्री ने संस्कृतप्रेमियों, शिक्षकों, विद्यार्थियों, धार्मिक संस्थाओं और सामाजिक संगठनों से इस जन-जागरण अभियान में सक्रिय भूमिका निभाने का आग्रह करते हुए कहा, “आइए, जनगणना 2027 को संस्कृत जागरण का जन-अभियान बनाएं और अपनी देववाणी संस्कृत को राष्ट्रीय चेतना के केंद्र में स्थापित करें।”

हिन्दुस्थान समाचार / राहुल शर्मा

Share this story