भाजपा के प्रवक्ताओं ने महबूबा मुफ्ती की विभाजनकारी और सांप्रदायिक राजनीति की निंदा की
जम्मू, 20 जनवरी (हि.स.)।
पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) की अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने एक बार फिर अपनी विभाजनकारी, कट्टर सांप्रदायिक और जम्मू-विरोधी राजनीतिक मानसिकता को उजागर किया है। उन्होंने प्रशासनिक सुविधा की आड़ में राजौरी-पूंछ और पूर्ववर्ती डोडा जिले के लिए संभागीय दर्जे की मांग को चुनिंदा रूप से उठाया है।
अपनी राजनीति के ध्रुवीकरणकारी स्वरूप से भलीभांति परिचित महबूबा मुफ्ती ने स्वयं स्वीकार किया कि उनके प्रस्ताव का विरोध होगा। जैसा कि सर्वविदित है महबूबा मुफ्ती का राजनीतिक आचरण लगातार विभाजनकारी और सांप्रदायिक रहा है। उनकी राजनीति सांप्रदायिक तुष्टीकरण, पहचान-आधारित लामबंदी और ऐसे रुख पर केंद्रित है जो बार-बार भारत के राष्ट्रीय हितों के विरुद्ध जाते हैं—चाहे वह पाकिस्तान और अलगाववादी तत्वों के साथ संवाद की वकालत करना हो या सिंधु जल संधि के निलंबन जैसी राष्ट्रीय नीतियों का विरोध करना हो।
ये चिंताएं भाजपा के जम्मू-कश्मीर केंद्र शासित प्रदेश के प्रवक्ताओं ने पार्टी मुख्यालय में आयोजित संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में व्यक्त कीं जिसे गिरधारी लाल रैना, डॉ. अभिजीत जसरोटिया और पूर्णिमा शर्मा ने संयुक्त रूप से संबोधित किया। प्रवक्ता ने सर्वसम्मति से मुफ्ती के जानबूझकर भड़काऊ और खतरनाक सांप्रदायिक बयान की निंदा करते हुए इसे क्षेत्रीय सद्भाव को बिगाड़ने और एकजुटता को कमजोर करने का एक और प्रयास बताया।
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हिन्दुस्थान समाचार / रमेश गुप्ता

