रमण सूरी ने भोजशाला फैसले का किया स्वागत
जम्मू,, 16 मई (हि.स.)।
भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता रमण सूरी ने मध्य प्रदेश के धार स्थित भोजशाला परिसर को लेकर इंदौर हाईकोर्ट के फैसले का स्वागत करते हुए इसे ऐतिहासिक अन्याय का अंत बताया है। उन्होंने कहा कि यह फैसला एक बार फिर साबित करता है कि सत्य को लंबे समय तक दबाया नहीं जा सकता और भारत की सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक पहचान सदैव कायम रहेगी।
रमण सूरी ने कहा कि भोजशाला केवल एक विवादित ढांचा नहीं बल्कि राजा भोज के वंशजों द्वारा स्थापित मां सरस्वती को समर्पित एक प्राचीन शिक्षण और आस्था का केंद्र रहा है। उन्होंने कहा कि हिंदू समाज ने वर्षों तक अपने धार्मिक स्थलों और विरासत के साथ हुए अन्याय का दर्द सहा, लेकिन हमेशा संवैधानिक और शांतिपूर्ण तरीके से न्याय की मांग की।
उन्होंने अयोध्या फैसले का उल्लेख करते हुए कहा कि देश अब ऐतिहासिक सच्चाइयों की पुनर्स्थापना का दौर देख रहा है। सूरी ने दावा किया कि पुरातात्विक साक्ष्य, शिलालेख और ऐतिहासिक अभिलेख भोजशाला के हिंदू स्वरूप को स्पष्ट रूप से दर्शाते हैं।
भाजपा नेता ने पूजा स्थल अधिनियम 1991 पर भी टिप्पणी करते हुए कहा कि यह कानून कई ऐतिहासिक विवादों के समाधान में बाधा बना हुआ है। उन्होंने कहा कि देश सभी धर्मों का सम्मान करता है लेकिन इतिहास की सच्चाइयों को नजरअंदाज कर सामंजस्य कायम नहीं किया जा सकता।
रमण सूरी ने शांति और आपसी सौहार्द बनाए रखने की अपील करते हुए कहा कि भाजपा देश की सांस्कृतिक विरासत और आस्था स्थलों की रक्षा के लिए संवैधानिक तरीके से प्रतिबद्ध है।
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हिन्दुस्थान समाचार / अश्वनी गुप्ता

