देवयान मार्ग पर चलकर ही संभव है मोक्ष की प्राप्ति-स्वामी राम स्वरूप जी

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देवयान मार्ग पर चलकर ही संभव है मोक्ष की प्राप्ति-स्वामी राम स्वरूप जी


कठुआ, 13 मई (हि.स.)। वेद मन्दिर योल में चल रहे 78 दिवसीय चारों वेदों के यज्ञानुष्ठान के 32वें दिन स्वामी राम स्वरूप योगाचार्य ने श्रद्धालुओं को अथर्ववेद मन्त्र 5/12/10 का गूढ़ अर्थ समझाया। उन्होंने कहा कि परमेश्वर ने सभी नर-नारियों को “देवानाम् पाथे” अर्थात् देवयान मार्ग पर चलने का उपदेश दिया है जिससे मनुष्य वेदों में बताए गए सद्गुणों को धारण कर सके और ईश्वर की उपासना व स्मरण से जीवन को सफल बना सके।

स्वामी जी ने सात्विक भोजन को भी आवश्यक बताते हुए कहा कि शुद्ध आहार से ही मन और विचार पवित्र बनते हैं। उन्होंने ऋग्वेद मन्त्र 10/18/1 का उल्लेख करते हुए बताया कि काल बार-बार मनुष्य को मृत्यु के अधीन करता है लेकिन जो साधक देवयान अर्थात मोक्ष मार्ग पर चलते हैं, उन्हें परमेश्वर पूर्ण आयु प्रदान करता है। उन्होंने आगे कहा कि जीवन का मुख्य उद्देश्य वेद मार्ग पर चलकर मोक्ष प्राप्त करना है, जहां जीव के सभी दुःख समाप्त हो जाते हैं और वह ईश्वर के सानिध्य में परमानंद का अनुभव करता है।

स्वामी राम स्वरूप ने अथर्ववेद मन्त्र 12/2/10 का हवाला देते हुए पितृयान मार्ग की भी व्याख्या की जिसे उन्होंने सांसारिक बंधनों का मार्ग बताया। इस मार्ग में मनुष्य काम, क्रोध, लोभ, अहंकार और भोग-विलास में फंसकर जन्म-मरण के चक्र में उलझा रहता है जिससे उसे परमेश्वर की प्राप्ति नहीं हो पाती। उन्होंने श्रद्धालुओं से आह्वान किया कि मानव जीवन को सार्थक बनाने के लिए देवयान मार्ग अपनाएं और वेदों के अनुसार आचरण कर मोक्ष की ओर अग्रसर हों।

मूल संदेश-मनुष्य जीवन का उद्देश्य केवल भोग-विलास नहीं बल्कि वेद मार्ग पर चलकर ईश्वर की प्राप्ति और मोक्ष हासिल करना है।

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हिन्दुस्थान समाचार / सचिन खजूरिया

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