वेद मार्ग पर चलकर ही संभव है मोक्ष की प्राप्ति-स्वामी राम स्वरूप

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वेद मार्ग पर चलकर ही संभव है मोक्ष की प्राप्ति-स्वामी राम स्वरूप


कठुआ, 05 मई (हि.स.)। वेद मन्दिर योल में चल रहे 78 दिवसीय चारों वेदों के यज्ञानुष्ठान के 24वें दिन स्वामी राम स्वरूप योगाचार्य ने श्रद्धालुओं को वेदों के गूढ़ ज्ञान से अवगत कराया। इस अवसर पर उन्होंने ऋग्वेद मन्त्र 1/26/5 एवं यजुर्वेद मन्त्र 7/48 के आधार पर मानव जीवन के उद्देश्य और कर्मों के महत्व पर प्रकाश डाला।

स्वामी जी ने कहा कि मनुष्य का जन्म भोग योनि और कर्म योनि दोनों में होता है जहां प्रत्येक व्यक्ति को अच्छे या बुरे कर्म करने की पूर्ण स्वतंत्रता है लेकिन उनके फल को भोगने में वह परतंत्र है। उन्होंने स्पष्ट किया कि कर्मों का फल केवल सर्वव्यापक परमेश्वर ही प्रदान करता है। पुण्य कर्म जहां सुखदायी होते हैं, वहीं पाप कर्म दुःख का कारण बनते हैं।

उन्होंने वेदों के अध्ययन को जीवन में आवश्यक बताते हुए कहा कि शुभ एवं पुण्य कर्मों का विस्तृत और रहस्यमय ज्ञान केवल वेदों में ही उपलब्ध है क्योंकि वेद विद्या ईश्वर प्रदत्त, अनादि और अविनाशी है। मनुष्य इस ज्ञान को प्राप्त कर ही विद्वान बनता है और अपने जीवन को सही दिशा देता है। स्वामी राम स्वरूप ने आगे कहा कि यह पृथ्वी मनुष्य के कर्म करने का एक विशाल क्षेत्र है, जहां हर व्यक्ति अपने कर्मों के अनुसार फल प्राप्त करता है। उन्होंने बताया कि जो व्यक्ति पाप प्रवृत्तियों में लिप्त रहता है, वह अगले जन्मों में दुःख भोगता है जबकि वेद मार्ग पर चलने वाला जिज्ञासु व्यक्ति आध्यात्मिक सुख प्राप्त कर मोक्ष की ओर अग्रसर होता है। अपने उपदेश में उन्होंने एक उदाहरण देते हुए समझाया कि जैसे कोई रथ पानी के जहाज में रखकर नदी पार कर लेता है और उसे कोई कष्ट नहीं होता, उसी प्रकार वेद ज्ञानी गुरु से ज्ञान प्राप्त कर मनुष्य सहजता से संसार रूपी सागर को पार कर मोक्ष पद प्राप्त कर सकता है। कार्यक्रम में उपस्थित श्रद्धालुओं ने स्वामी जी के विचारों को ध्यानपूर्वक सुना और वेद मार्ग पर चलने का संकल्प लिया।

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हिन्दुस्थान समाचार / सचिन खजूरिया

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