14 जुलाई को मनाई जाएगी आषाढ़ अमावस्या, पितृ तर्पण व दान-पुण्य का रहेगा विशेष महत्व

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14 जुलाई को मनाई जाएगी आषाढ़ अमावस्या, पितृ तर्पण व दान-पुण्य का रहेगा विशेष महत्व


14 जुलाई को मनाई जाएगी आषाढ़ अमावस्या, पितृ तर्पण व दान-पुण्य का रहेगा विशेष महत्व


जम्मू, 10 जुलाई (हि.स.)। आषाढ़ अमावस्या इस वर्ष 14 जुलाई को मनाई जाएगी। इस अवसर पर पितृ तर्पण, श्राद्ध, दान-पुण्य और स्नान का विशेष धार्मिक महत्व रहेगा। कैलख ज्योतिष एवं वैदिक संस्थान ट्रस्ट जम्मू के अध्यक्ष एवं ज्योतिषाचार्य महंत रोहित शास्त्री ने बताया कि अमावस्या तिथि के स्वामी पितृदेव माने जाते हैं और इस दिन पितरों के निमित्त किए गए तर्पण, श्राद्ध तथा दान-पुण्य का विशेष फल प्राप्त होता है।

उन्होंने बताया कि आषाढ़ कृष्ण पक्ष अमावस्या तिथि 13 जुलाई की शाम 6:50 बजे प्रारंभ होगी और 14 जुलाई को दोपहर 3:14 बजे तक रहेगी। सूर्योदय व्यापिनी तिथि होने के कारण आषाढ़ अमावस्या 14 जुलाई मंगलवार को मनाई जाएगी जिसे भौमवती अमावस्या भी कहा जाता है।

महंत रोहित शास्त्री ने कहा कि श्रद्धालु यदि पवित्र नदियों में स्नान नहीं कर सकते तो घर पर स्नान के जल में गंगाजल मिलाकर स्नान करें तथा अपनी सामर्थ्य के अनुसार जरूरतमंदों को दान दें। उन्होंने बताया कि इस दिन पितरों की शांति के लिए तर्पण, पीपल वृक्ष की पूजा, काले तिल, जल एवं पुष्प अर्पित करना तथा 'ॐ पितृभ्यः नमः' मंत्र का जाप करना शुभ माना गया है। साथ ही सूर्यदेव को तांबे के पात्र से अर्घ्य देने और भगवान विष्णु एवं माता लक्ष्मी की पूजा करने का भी विशेष महत्व बताया गया है।

उन्होंने श्रद्धालुओं को अमावस्या के दिन तामसिक भोजन, नशा तथा चमड़े की वस्तुओं के उपयोग से बचने, ब्रह्मचर्य का पालन करने और सात्विक जीवनशैली अपनाने की सलाह दी। महंत शास्त्री ने कहा कि धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन किया गया दान, विशेषकर तिल, चावल, वस्त्र, गुड़ और अन्य आवश्यक वस्तुओं का दान, पुण्यदायी माना जाता है। उन्होंने लोगों से अपनी राशि के अनुसार दान करने और पितरों के प्रति श्रद्धा व्यक्त करते हुए धार्मिक परंपराओं का पालन करने की अपील की।

हिन्दुस्थान समाचार / राहुल शर्मा

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