वेद मंदिर योल में यज्ञानुष्ठान का 61वां दिन-स्वामी राम स्वरूप जी ने अथर्ववेद का दिया संदेश

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वेद मंदिर योल में यज्ञानुष्ठान का 61वां दिन-स्वामी राम स्वरूप जी ने अथर्ववेद का दिया संदेश


कठुआ, 11 जून (हि.स.)। वेद मंदिर योल में चल रहे 78 दिवसीय चारों वेदों के यज्ञानुष्ठान के 61वें दिन स्वामी राम स्वरूप जी योगाचार्य ने श्रद्धालुओं को अथर्ववेद काण्ड 6 के सूक्त 61 और 62 का विस्तार से उपदेश दिया।

उन्होंने कहा कि परमेश्वर स्वयं मंत्रों में कहते हैं “अहम् पृथिवीं उत द्याम् विवेच”, अर्थात् परमेश्वर ही पृथ्वी लोक और द्युलोक (सूर्य-चन्द्रमा सहित) को अलग-अलग धारण किए हुए हैं। वही मनुष्य के शरीर की रचना करने वाला है और सत्य-असत्य का ज्ञान देने वाला भी वही है। उन्होंने बताया कि दिव्य वेद वाणी का प्रकाश भी परमेश्वर ही करता है। स्वामी जी ने कहा कि वेदों में ही परमेश्वर का सच्चा वर्णन मिलता है और उसके अतिरिक्त कोई भी सृष्टि की रचना करने में सक्षम नहीं है। इसलिए मनुष्य को वेदों में वर्णित परमेश्वर को जानकर उसी की उपासना करनी चाहिए।

उन्होंने आगे कहा कि परमेश्वर ने मानव कल्याण, दुःखों के नाश और सत्य के प्रकाश के लिए वेद वाणी के अध्ययन का उपदेश दिया है लेकिन इसे अनदेखा कर मनुष्य ने स्वयं दुःखों को आमंत्रित किया है। वेदों का अध्ययन मनुष्य को धन का स्वामी बनाता है, न कि उसका दास। उन्होंने यह भी बताया कि वेद वाणी का अध्ययन पापों का नाश करता है, मन और बुद्धि को शुद्ध करता है तथा मनुष्य को दीर्घायु बनाता है। अंत में उन्होंने श्रद्धालुओं से आह्वान किया कि सतयुग, त्रेता और द्वापर की भांति पुनः वेदों को अपनाकर जीवन को सुखमय बनाया जाए।

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हिन्दुस्थान समाचार / सचिन खजूरिया

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