हिमाचल में डॉक्टरों की पेन-डाउन हड़ताल दो सप्ताह के लिए स्थगित,

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शिमला, 01 नवंबर (हि.स.)। हिमाचल प्रदेश के सरकारी मेडिकल कॉलेजों के डॉक्टरों ने अपनी प्रस्तावित पेन-डाउन हड़ताल दो सप्ताह के लिए स्थगित कर दी है। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के साथ हुई बैठक और फैकल्टी के तबादला आदेश रद्द होने के बाद राज्य चिकित्सा एवं दंत चिकित्सा महाविद्यालय शिक्षक संघ (एसएएमडीसीओटी) ने यह निर्णय लिया है। इससे मेडिकल कॉलेजों में स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित होने की आशंका फिलहाल खत्म हो गई है। आईजीएमसी शिमला में सोमवार से ओपीडी, जांच, ऑपरेशन थिएटर और आपातकालीन सेवाएं सामान्य रूप से चलेंगी।

एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. बलबीर एस. वर्मा के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल ने हाल ही में मुख्यमंत्री से मुलाकात की। बैठक में स्वास्थ्य सचिव भी मौजूद रहे। इसमें चिकित्सा शिक्षकों के तबादलों और सेवा शर्तों से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई। एसोसिएशन के अनुसार मुख्यमंत्री ने उन एसोसिएट प्रोफेसरों और प्रोफेसरों के तबादला आदेश रद्द करने के निर्देश दिए, जिन्हें कार्यमुक्त नहीं किया गया था अथवा जिन्होंने अदालत का रुख नहीं किया था। इन आदेशों को रद्द करने की औपचारिक अधिसूचना शनिवार को जारी कर दी गई।

डॉ. बलबीर एस. वर्मा ने मुख्यमंत्री का आभार जताते हुए कहा कि उनके हस्तक्षेप से फैकल्टी सदस्यों का विश्वास बहाल हुआ है। सरकार के आश्वासनों पर औपचारिक अधिसूचनाएं जारी करने और सहमत मुद्दों पर कार्रवाई के लिए एसोसिएशन ने दो सप्ताह का समय दिया है। इस अवधि के बाद मांगों पर हुई प्रगति की समीक्षा की जाएगी।

गौरतलब है कि एसोसिएशन ने 2 से 4 नवंबर तक रोजाना सुबह 9:30 से 11 बजे तक डेढ़ घंटे की पेन-डाउन हड़ताल का ऐलान किया था। इसके बाद 5 नवंबर को सामूहिक आकस्मिक अवकाश लेकर शिमला में सचिवालय तक विरोध मार्च निकालने की योजना थी। डॉक्टरों ने तबादला आदेशों और सेवा शर्तों में कथित भेदभाव को आंदोलन की वजह बताया था।

बैठक में फैकल्टी के लिए दो महीने के चक्र वाली पारदर्शी रोटेशन नीति लागू करने पर सहमति बनी। इसके अलावा आईजीएमसी, एम्स चमियाना और प्रदेश के अन्य सरकारी मेडिकल कॉलेजों में सेवा शर्तें एकसमान करने, पदनामित सहायक प्रोफेसरों के लिए नो वैकेशन नीति, नियमित सहायक प्रोफेसरों को नॉन-प्रैक्टिसिंग अलाउंस (एनपीए) देने और सीनियर रेजिडेंट नीति में सुधार पर भी सहमति बनी है। हिमाचल के मेडिकल कॉलेजों से पीजी करने वाले डॉक्टरों को प्राथमिकता और करियर प्रोत्साहन देने के लिए पीजी बॉन्ड नीति की समीक्षा भी की जाएगी।

एसोसिएशन ने आईजीएमसी शिमला और एम्स चमियाना के एकीकृत प्रशासन की मांग भी उठाई है। संघ के अनुसार, एम्स चमियाना आईजीएमसी का सुपरस्पेशियलिटी ब्लॉक है और वहां की डीएम तथा एमसीएच सीटें आईजीएमसी के तहत संचालित होती हैं। एसोसिएशन का तर्क है कि दोहरी प्रशासनिक व्यवस्था से संस्थानों का कामकाज प्रभावित होता है। इसके साथ ही संघ ने राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (एनएमसी) के मानकों को अनिवार्य बताते हुए कहा कि इनकी अनदेखी से एमबीबीएस, एमडी-एमएस और सुपरस्पेशियलिटी पाठ्यक्रमों की सीटों की मान्यता पर असर पड़ सकता है।

उधर, आईजीएमसी के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. राहुल ने बताया कि मुख्यमंत्री और एसोसिएशन के बीच सकारात्मक बातचीत के बाद हड़ताल स्थगित हो गई है। सोमवार से अस्पताल में सभी ओपीडी, जांच, ऑपरेशन थिएटर और आपातकालीन सेवाएं सुबह 9:30 बजे से निर्धारित समय पर चलेंगी। उन्होंने मरीजों से अफवाहों पर ध्यान नहीं देने और बेझिझक अस्पताल आने की अपील की।

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हिन्दुस्थान समाचार / उज्जवल शर्मा

Livevns.news Desk
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