हिमाचल में अधिकारियों को इंटरनेट खर्च की भी मिलेगी तय राशि, सरकार ने बदले नियम

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शिमला, 05 फ़रवरी (हि.स.)। डिजिटल दौर में सरकारी कामकाज तेजी से ऑनलाइन होने के बीच हिमाचल प्रदेश सरकार ने अधिकारियों के घरों पर इस्तेमाल होने वाली संचार सुविधाओं से जुड़े नियमों में बदलाव किया है। अब अधिकारियों को केवल लैंडलाइन और मोबाइल ही नहीं बल्कि इंटरनेट आधारित संचार सेवाओं के खर्च के लिए भी तय सीमा तक राशि दी जाएगी। वित्त विभाग ने इस संबंध में आदेश जारी कर सभी विभागों को इसे लागू करने के निर्देश दिए हैं।

सरकार का कहना है कि पहले अधिकारियों को उनके आवास पर लगे टेलीफोन के खर्च के लिए ही निर्धारित राशि मिलती थी, लेकिन अब प्रशासनिक कामकाज में इंटरनेट का उपयोग तेजी से बढ़ गया है। इसलिए ‘फिक्स्ड बाइमंथली रेजिडेंशियल टेलीफोन अमाउंट’ के दायरे में इंटरनेट आधारित संचार सुविधाओं को भी शामिल कर दिया गया है। इससे अधिकारी घर से भी सरकारी कामकाज आसानी से कर सकेंगे और काम की गति बेहतर होगी।

इस संदर्भ में जारी आदेश के अनुसार अलग-अलग श्रेणियों के अधिकारियों के लिए खर्च की अलग-अलग सीमा तय की गई है। मंत्रिपरिषद के सदस्य, मुख्य सचिव, अतिरिक्त मुख्य सचिव, पुलिस महानिदेशक और मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव जैसे वरिष्ठ अधिकारियों को उनके वास्तविक बिल के अनुसार भुगतान मिलेगा। सचिव स्तर के अधिकारियों और विभागाध्यक्षों को लैंडलाइन के लिए अधिकतम 2500 रुपये और मोबाइल के लिए 900 रुपये की सीमा तय की गई है। मंडलायुक्त, डीआईजी, उपायुक्त और जिला स्तर के वरिष्ठ अधिकारियों के लिए लैंडलाइन की सीमा 2100 रुपये और मोबाइल के लिए 800 रुपये रखी गई है। अतिरिक्त डीजीपी, प्रबंध निदेशक, मुख्य अभियंता और मुख्य वन संरक्षक जैसे अधिकारियों के लिए यह सीमा क्रमशः 2000 रुपये और 700 रुपये होगी, जबकि अन्य पात्र वरिष्ठ अधिकारियों को लैंडलाइन के लिए 700 रुपये और मोबाइल के लिए 400 रुपये तक की राशि दी जाएगी।

आदेश के तहत इंटरनेट या अन्य संचार सुविधाओं के खर्च की राशि तभी दी जाएगी, जब संबंधित अधिकारी इन सेवाओं के लगाए जाने का प्रमाण संबंधित विभाग को देंगे।

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हिन्दुस्थान समाचार / उज्जवल शर्मा

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