हिमाचल के स्कूलों में ट्रांसजेंडर विद्यार्थियों के लिए बनेगी निगरानी समिति, भेदभाव रोकने के निर्देश

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शिमला, 22 जुलाई (हि.स.)। हिमाचल प्रदेश सरकार ने ट्रांसजेंडर विद्यार्थियों के अधिकारों की सुरक्षा और उन्हें शिक्षा में समान अवसर उपलब्ध कराने के लिए सभी स्कूलों और शिक्षण संस्थानों को नए निर्देश जारी किए हैं। सरकार ने कहा है कि ट्रांसजेंडर विद्यार्थियों के साथ किसी भी तरह का भेदभाव नहीं होना चाहिए और उन्हें सुरक्षित शैक्षणिक माहौल उपलब्ध कराया जाए।

ये निर्देश सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय, भारत सरकार के तहत ट्रांसजेंडर पर्सन्स (प्रोटेक्शन ऑफ राइट्स) अधिनियम, 2019 और नियम, 2020 के प्रभावी क्रियान्वयन के संबंध में जारी किए गए हैं। यह प्रक्रिया सुप्रीम कोर्ट में लंबित जेन कौशिक बनाम भारत संघ मामले के संदर्भ में राज्यों से मांगी गई जानकारी के आधार पर आगे बढ़ाई जा रही है।

शिक्षा विभाग ने सभी शिक्षण संस्थानों को निर्देश दिए हैं कि ट्रांसजेंडर विद्यार्थियों को बिना किसी भेदभाव के शिक्षा प्राप्त करने का अवसर दिया जाए। साथ ही जेंडर नॉन-कन्फॉर्मिंग विद्यार्थियों को बुलिंग, उत्पीड़न और किसी भी प्रकार की हिंसा से बचाने के लिए आवश्यक सुरक्षा उपाय तत्काल लागू किए जाएं।

सरकार ने जिला स्तर पर ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के लिए एंटी-डिस्क्रिमिनेशन सेल गठित करने के निर्देश भी दिए हैं। इसके अलावा हर स्कूल और शिक्षण संस्थान में एक मॉनिटरिंग कमेटी बनाई जाएगी। यह समिति ट्रांसजेंडर विद्यार्थियों के साथ होने वाले भेदभाव, यौन उत्पीड़न और अन्य प्रकार की हिंसा से जुड़े मामलों की निगरानी करेगी और शिकायतों के समाधान पर भी नजर रखेगी।

इससे पहले अनुसूचित जाति, अन्य पिछड़ा वर्ग, अल्पसंख्यक एवं विशेष रूप से सक्षम व्यक्तियों के सशक्तिकरण निदेशालय ने स्कूल शिक्षा और उच्च शिक्षा निदेशालय से ट्रांसजेंडर विद्यार्थियों के लिए उठाए गए कदमों की विस्तृत जानकारी मांगी थी। इसमें विशेष रूप से पूछा गया है कि स्कूल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत ट्रांसजेंडर विद्यार्थियों की देखभाल, बुलिंग रोकने और पढ़ाई बीच में छोड़ने की घटनाएं कम करने के लिए अब तक क्या कदम उठाए गए हैं।

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हिन्दुस्थान समाचार / उज्जवल शर्मा

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