स्कूली शिक्षा की गुणवत्ता सुधार में एससीईआरटी की अहम भूमिका : रोहित ठाकुर

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स्कूली शिक्षा की गुणवत्ता सुधार में एससीईआरटी की अहम भूमिका : रोहित ठाकुर


शिमला, 20 जनवरी (हि.स.)। हिमाचल प्रदेश में स्कूली शिक्षा की गुणवत्ता को बेहतर बनाने में राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एससीईआरटी) की भूमिका लगातार मजबूत हो रही है। शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने कहा है कि एससीईआरटी प्रदेश सरकार का एक महत्वपूर्ण थिंक टैंक है, जो पाठ्यक्रम निर्धारण के साथ-साथ शिक्षण और सीखने की प्रक्रिया को बेहतर बनाने में सक्रिय भूमिका निभा रहा है। वह मंगलवार को शिमला में एससीईआरटी के कार्यों की समीक्षा बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे।

शिक्षा मंत्री ने कहा कि लंबे समय तक एससीईआरटी और जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डाइट) को केवल प्रशासनिक समायोजन के संस्थान के रूप में देखा जाता रहा, लेकिन वर्तमान राज्य सरकार इन संस्थानों को शिक्षक प्रशिक्षण और अकादमिक नवाचार के मजबूत केंद्र के रूप में विकसित कर रही है। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा एससीईआरटी और डाइट में व्यापक सुधार किए जा रहे हैं, ताकि ये संस्थान आधुनिक शिक्षा की जरूरतों के अनुरूप कार्य कर सकें।

रोहित ठाकुर ने शिक्षा विभाग, समग्र शिक्षा, एससीईआरटी और डाइट से जुड़े अधिकारियों और शिक्षकों से कहा कि बदलते समय और नई शैक्षिक चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए अपनी शिक्षण रणनीतियों में लगातार सुधार करें। उन्होंने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसी नई तकनीकें तेजी से शिक्षा के क्षेत्र में प्रवेश कर रही हैं। इनका उपयोग इस तरह होना चाहिए कि शिक्षा व्यवस्था मजबूत हो और छात्रों की सीखने की प्रक्रिया अधिक प्रभावी बने, न कि इनका गलत इस्तेमाल हो।

बैठक में एससीईआरटी की ओर से सरकारी स्कूलों में लागू किए जाने वाले होलिस्टिक प्रोग्रेस कार्ड पर भी प्रस्तुति दी गई। बताया गया कि इस प्रोग्रेस कार्ड के जरिए विद्यार्थियों का मूल्यांकन केवल अंकों के आधार पर नहीं, बल्कि उनकी शैक्षणिक प्रगति के साथ-साथ खेल, सांस्कृतिक गतिविधियों, सामाजिक सहभागिता, व्यवहार, स्वास्थ्य और जीवन कौशल जैसे पहलुओं को भी शामिल किया जाएगा। इससे शिक्षकों को विद्यार्थियों की रुचियों, क्षमताओं और सीखने की जरूरतों को बेहतर ढंग से समझने में मदद मिलेगी। विद्यार्थियों से जुड़ा जरूरी डाटा सुरक्षित रूप से संरक्षित किया जाएगा, ताकि शिक्षण प्रक्रिया को और प्रभावी बनाया जा सके।

समग्र शिक्षा निदेशक राजेश शर्मा ने कहा कि एससीईआरटी और डाइट को राज्य में शिक्षक प्रशिक्षण और अकादमिक सहयोग के मजबूत केंद्रों के रूप में विकसित किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप पाठ्यक्रम के प्रभावी क्रियान्वयन, शिक्षक क्षमता निर्माण और विद्यालयों तक नवाचार आधारित शिक्षण पद्धतियां पहुंचाने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। उन्होंने होलिस्टिक प्रोग्रेस कार्ड को स्कूली शिक्षा में मूल्यांकन प्रणाली का एक महत्वपूर्ण सुधार बताया।

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हिन्दुस्थान समाचार / उज्जवल शर्मा

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