सतत कृषि के लिए सामूहिक, नवाचारी और समावेशी दृष्टिकोण जरूरी : सी. पालरासु

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सतत कृषि के लिए सामूहिक, नवाचारी और समावेशी दृष्टिकोण जरूरी : सी. पालरासु


धर्मशाला, 26 फ़रवरी (हि.स.)। सचिव (कृषि) डॉ. सी. पालरासु ने राज्य के पहाड़ी क्षेत्रों में कृषि की स्थिरता के लिए सही दिशा तय करने हेतु सामूहिक, नवाचारी और समावेशी दृष्टिकोण अपनाने का आह्वान किया। वह बुधवार देर शाम धर्मशाला के धौलाधार हाइट्स रिजॉर्ट्स में आयोजित ‘सतत कृषि एवं कृषि-व्यवसाय विकास’ विषय पर प्रथम राष्ट्रीय कार्यशाला के समापन सत्र में मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित कर रहे थे।

डॉ. पॉलरासु ने कहा कि स्थिरता एक सामूहिक प्रयास है, जिसमें किसान, संस्थान, निजी क्षेत्र और समुदाय सभी को साथ मिलकर आगे बढ़ना होगा। उन्होंने कहा कि कृषि के भविष्य को सही दिशा देने के लिए तकनीक, स्मार्ट प्रथाओं और नए व्यावसायिक मॉडलों में नवाचार आवश्यक है। साथ ही, उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि समाज के सभी वर्गों—महिलाओं, छोटे किसानों, युवाओं और कमजोर समुदायों को इस परिवर्तन के केंद्र में शामिल करना अनिवार्य है।

परियोजना निदेशक डॉ. सुनील चौहान ने राज्य सरकार और जायका इंडिया के प्रतिनिधियों को आश्वस्त किया कि परियोजना के अपेक्षित परिणामों को ध्यान में रखते हुए विकास कार्यों में तेजी लाई जाएगी। 1010 करोड़ रुपये की इस चरण-2 परियोजना के तहत 296 उप-परियोजनाओं के माध्यम से 8000 हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में सिंचाई प्रणाली विकसित की जाएगी, जिससे 30 हजार परिवारों को लाभ मिलेगा तथा लगभग 7 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में फसल विविधीकरण किया जाएगा।

जायका-इंडिया के प्रतिनिधिमंडल में वरिष्ठ प्रतिनिधि वाकामात्सु एइजी और विकास विशेषज्ञ निश्ता वेंगुर्लेकर सहित अन्य प्रतिनिधि शामिल थे, जो समापन सत्र में उपस्थित रहे।

हिन्दुस्थान समाचार / सतेंद्र धलारिया

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