भारतीय उच्च अध्ययन संस्थान में शुक्रवार को होगा रबीन्द्रनाथ टैगोर चित्रदीर्घा का उद्घाटन

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भारतीय उच्च अध्ययन संस्थान में शुक्रवार को होगा रबीन्द्रनाथ टैगोर चित्रदीर्घा का उद्घाटन


भारतीय उच्च अध्ययन संस्थान में शुक्रवार को होगा रबीन्द्रनाथ टैगोर चित्रदीर्घा का उद्घाटन


शिमला, 05 मार्च (हि.स.)। शिमला के राष्ट्रपति निवास स्थित भारतीय उच्च अध्ययन संस्थान (आईआईएएस) में 6 मार्च यानी शुक्रवार को 27वें डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन स्मृति व्याख्यान का आयोजन किया जाएगा। इसी अवसर पर संस्थान परिसर में नवस्थापित “गुरुदेव रबीन्द्रनाथ टैगोर चित्रदीर्घा” का उद्घाटन भी किया जाएगा। यह कार्यक्रम संस्थान के 60 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में रखा गया है।

कार्यक्रम शुक्रवार को सुबह 10 बजकर 15 मिनट से संस्थान के लाइब्रेरी हॉल में शुरू होगा। कार्यक्रम की अध्यक्षता संस्थान की अध्यक्ष प्रो. शशि प्रभा कुमार करेंगी। मुख्य व्याख्यान अशोका विश्वविद्यालय, सोनीपत के दर्शनशास्त्र के विशिष्ट प्रोफेसर अरिंदम चक्रवर्ती देंगे। संस्थान के निदेशक प्रो. हिमांशु कुमार चतुर्वेदी स्वागत और परिचयात्मक वक्तव्य प्रस्तुत करेंगे।

इस वर्ष व्याख्यान का विषय है — “Humanity as the Heart and Honey of All Living Beings: The Idealistic Realism of Bṛhadāraṇyaka Upanishad.” इस व्याख्यान में बृहदारण्यक उपनिषद के मधुकांड की दार्शनिक व्याख्या के माध्यम से मानवता और जीवन के मूल प्रश्नों पर चर्चा की जाएगी। आदि शंकर के अद्वैत दर्शन, जर्मन दार्शनिक इमैनुएल कांट के विचार और रबीन्द्रनाथ टैगोर के मानवीय दृष्टिकोण के संदर्भ में आदर्शवाद और यथार्थवाद के संबंधों को समझाने का प्रयास किया जाएगा। आज की दुनिया में राजनीतिक अस्थिरता, आर्थिक असमानता और पर्यावरण संकट जैसे मुद्दों के बीच मानवीय मूल्यों की अहमियत पर भी बात होगी।

इसी मौके पर “गुरुदेव रबीन्द्रनाथ टैगोर चित्रदीर्घा” का उद्घाटन किया जाएगा। यह चित्रदीर्घा टैगोर के जीवन, उनके विचारों और रचनात्मक योगदान को समर्पित है। इसमें उनके जीवन के अलग-अलग चरणों से जुड़े दुर्लभ चित्र लगाए गए हैं। साथ ही उनके समकालीन महान व्यक्तित्वों के साथ संवाद और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उनकी भागीदारी को भी दर्शाया गया है।

चित्रदीर्घा की एक दीवार उनकी साहित्यिक, कलात्मक और नाट्य कृतियों को समर्पित है, जबकि दूसरी दीवार पर शांतिनिकेतन और श्रीनिकेतन में उनके शैक्षिक प्रयोगों और सांस्कृतिक गतिविधियों की झलक दिखाई गई है। संस्थान के अधिकारियों के अनुसार यह चित्रदीर्घा शोधार्थियों, विद्यार्थियों और आगंतुकों के लिए खास आकर्षण का केंद्र बनेगी और भारत की समृद्ध बौद्धिक परंपरा को समझने का अवसर देगी।

डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन स्मृति व्याख्यान संस्थान की प्रतिष्ठित वार्षिक परंपरा है, जिसमें देश-विदेश के विद्वान समकालीन दार्शनिक और मानवीय विषयों पर अपने विचार रखते हैं। इस बार का आयोजन संस्थान के 60 वर्ष पूरे होने के कारण विशेष महत्व रखता है।

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हिन्दुस्थान समाचार / उज्जवल शर्मा

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