नाहन में बंदरों का जानलेवा हमला, ट्यूशन जा रहे 13 वर्षीय मासूम को बंदरों ने लहूलुहान किया

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नाहन, 21 अप्रैल (हि.स.)। नाहन इन दिनों एक गंभीर संकट के दौर से गुजर रहा है। ऐतिहासिक शहर की गलियों और मोहल्लों में अब बच्चों का खेलना या बुजुर्गों का अकेले टहलना जानलेवा साबित हो रहा है। शहर में बंदरों का आतंक इस कदर बढ़ गया है कि वे अब केवल खाने का सामान नहीं छीन रहे, बल्कि इंसानों पर हिंसक हमले कर उन्हें लहूलुहान कर रहे हैं। ताजा घटना मंगलवार शाम की है, जब कच्चा टैंक इलाके में ट्यूशन जा रहे एक मासूम 13 वर्षीय बच्चे को बंदरों के झुंड ने घेरकर अपना शिकार बनाया।

जानकारी के अनुसार, शाम करीब 5 बजे नबील पुत्र आमीन जब अपने घर से ट्यूशन जा रहा था, तभी 3 से 4 खूंखार बंदरों ने उसे रास्ते में घेर लिया। इससे पहले कि बच्चा कुछ समझ पाता या मदद के लिए चिल्लाता, बंदरों ने उस पर पीछे से हमला कर दिया और बुरी तरह काट खाया। बच्चे की चीख-पुकार सुनकर जब तक स्थानीय लोग उसे बचाने के लिए दौड़े, तब तक बंदर उसे घायल कर चुके थे। इस घटना ने पूरे कच्चा टैंक इलाके में अभिभावकों और बच्चों के बीच डर का माहौल पैदा कर दिया है।।

शहर की स्थिति का अंदाजा डॉ. वाई.एस. परमार मेडिकल कॉलेज नाहन के आंकड़ों से लगाया जा सकता है। अस्पताल के सूत्रों के अनुसार, पिछले कुछ हफ्तों से बंदरों के काटने के मामलों में भारी इजाफा हुआ है। आलम यह है कि रोजाना 5 से 10 लोग बंदरों के हमले का शिकार होकर इलाज और एंटी-रेबीज इंजेक्शन लगवाने अस्पताल पहुँच रहे हैं। इनमें बच्चों और बुजुर्गों की संख्या सबसे अधिक है, जो इन जानवरों के आसान शिकार बन रहे हैं।

स्थानीय निवासियों का कहना है कि यह समस्या केवल किसी एक मोहल्ले की नहीं, बल्कि समूचे नाहन शहर की है। शहर की मुख्य सड़कों से लेकर तंग गलियों तक और रिहायशी मकानों की छतों से लेकर बालकनी तक, हर जगह बंदरों की टोलियों का ही कब्जा है। स्थिति इतनी विकट हो गई है कि लोग अपने ही घरों की छतों और बालकनी में जाने से कतराने लगे हैं। बंदरों के खौफ के कारण नागरिकों को भरी गर्मी में भी अपने घरों की खिड़कियां और दरवाजे दिन भर बंद रखने को मजबूर होना पड़ रहा है।

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हिन्दुस्थान समाचार / जितेंद्र ठाकुर

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