कांग्रेस में अनुशासनहीनता पर सख्ती, पूर्व विधायक नीरज भारती 6 साल के लिए पार्टी से बर्खास्त
शिमला, 09 जून (हि.स.)। हिमाचल प्रदेश कांग्रेस ने पार्टी अनुशासन को लेकर बड़ा संदेश देते हुए पूर्व विधायक और पार्टी के पूर्व उपाध्यक्ष नीरज भारती को छह साल के लिए पार्टी से बर्खास्त कर दिया है। शिमला स्थित राजीव भवन में मंगलवार को प्रदेश कांग्रेस की अनुशासन समिति की बैठक में इस फैसले पर सर्वसम्मति से मुहर लगाई गई। बैठक में यह भी स्पष्ट किया गया कि भविष्य में कोई भी नेता या कार्यकर्ता मीडिया या सोशल मीडिया के माध्यम से पार्टी और सरकार के खिलाफ बयानबाजी करता है तो उसके खिलाफ भी कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
कांग्रेस अनुशासन समिति की बैठक समिति के अध्यक्ष और विधायक कुलदीप सिंह राठौर की अध्यक्षता में हुई। बैठक में उद्योग मंत्री हर्षवर्धन चौहान, विधायक आशीष बुटेल, हरदीप सिंह बाबा, अनुराधा राणा, कांग्रेस संगठन महासचिव विनोद जिंटा और अमित नंदा सहित अन्य सदस्य मौजूद रहे। बैठक में नीरज भारती के खिलाफ पहले से की गई कार्रवाई पर विस्तार से चर्चा की गई और उन्हें छह साल के लिए पार्टी से निष्कासित करने के निर्णय को मंजूरी दी गई।
बैठक के बाद कुलदीप सिंह राठौर ने कहा कि कांग्रेस में अनुशासनहीनता किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि यदि किसी नेता को कोई शिकायत या असहमति है तो उसके लिए पार्टी के भीतर उचित मंच मौजूद हैं। मीडिया या सोशल मीडिया के जरिए पार्टी और सरकार के खिलाफ टिप्पणी करना स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने साफ कहा कि जो भी नेता पार्टी की विचारधारा और अनुशासन के खिलाफ जाएगा, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी। राठौर ने कहा कि पार्टी में रहना है तो पार्टी अनुशासन का पालन करना होगा।
अनुशासन समिति ने नीरज भारती के अलावा हरि सिंह, लाभ सिंह और आकाश शर्मा को भी अनुशासनहीनता के आरोप में छह साल के लिए पार्टी से निष्कासित करने के निर्णय पर मुहर लगाई।
नीरज भारती को लेकर कांग्रेस में पिछले कुछ समय से विवाद बना हुआ था। कुछ दिन पहले उन्होंने प्रदेश कांग्रेस उपाध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद उन्होंने सोशल मीडिया पर लगातार मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सूक्खु की कार्यशैली, सरकार और कांग्रेस संगठन को लेकर सवाल उठाए थे। पार्टी नेतृत्व ने उनकी इन टिप्पणियों को अनुशासनहीनता माना था।
नीरज भारती सूक्खु सरकार में कैबिनेट मंत्री चंद्र कुमार के बेटे हैं और हिमाचल प्रदेश की राजनीति में एक चेहरा रहे हैं। वह दो बार कांग्रेस के विधायक रह चुके हैं। पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार में उन्होंने मुख्य संसदीय सचिव (सीपीएस) के रूप में भी जिम्मेदारी निभाई थी। बाद में उन्हें प्रदेश कांग्रेस का उपाध्यक्ष बनाया गया था, लेकिन मुख्यमंत्री की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए उन्होंने इस पद से इस्तीफा दे दिया था।
कांग्रेस नेतृत्व का कहना है कि पार्टी के भीतर अपनी बात रखने की पूरी स्वतंत्रता है, लेकिन सार्वजनिक मंचों पर संगठन और सरकार के खिलाफ बयानबाजी स्वीकार नहीं की जाएगी। अनुशासन समिति की बैठक के जरिए कांग्रेस ने यह स्पष्ट संकेत देने की कोशिश की है कि पार्टी अनुशासन के मामलों में अब कोई ढिलाई नहीं बरती जाएगी।
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हिन्दुस्थान समाचार / उज्जवल शर्मा

