सड़क के लिए कटने थे पेड़, रक्षक बनकर उनसे लिपट गईं महिलाएं; बैरंग लौटी टीम

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सड़क के लिए कटने थे पेड़, रक्षक बनकर उनसे लिपट गईं महिलाएं; बैरंग लौटी टीम


सड़क के लिए कटने थे पेड़, रक्षक बनकर उनसे लिपट गईं महिलाएं; बैरंग लौटी टीम


नाहन, 01 अप्रैल (हि.स.)। पावंटा साहिब उपमंडल के नारीवाला से जम्बू खाले तक प्रस्तावित सड़क निर्माण को लेकर क्षेत्र में तनाव की स्थिति बनी हुई है। पर्यावरण संरक्षण की एक मिसाल पेश करते हुए स्थानीय महिलाओं ने उत्तराखंड के प्रसिद्ध ‘चिपको आंदोलन’ की तर्ज पर पेड़ों को बचाने के लिए मोर्चा खोल दिया है।

जानकारी के अनुसार इस सड़क निर्माण के लिए वन क्षेत्र के लगभग 100 से अधिक बेशकीमती पेड़ों का कटान प्रस्तावित है। जैसे ही कॉरपोरेशन की टीम लाव-लश्कर के साथ पेड़ों की कटाई करने मौके पर पहुँची, तीन पंचायतों की भारी संख्या में महिलाएं वहां एकत्र हो गईं। विरोध स्वरूप महिलाएं पेड़ों से लिपट गईं और साफ कर दिया कि पेड़ों पर कुल्हाड़ी चलने से पहले उन्हें महिलाओं के विरोध का सामना करना होगा। ग्रामीणों के इस कड़े रुख को देखते हुए टीम को बिना किसी कार्रवाई के वापस लौटना पड़ा।

इस सड़क का विरोध केवल एक गांव तक सीमित नहीं है, बल्कि तीन पंचायतों के ग्रामीण एकजुट होकर इसके खिलाफ खड़े हैं। ग्रामीणों का तर्क है कि विकास के नाम पर बड़े पैमाने पर हो रही हरियाली की बलि पर्यावरण के लिए आत्मघाती कदम है।आंदोलनकारी महिलाओं ने दो टूक शब्दों में कहा, “ये पेड़ हमारे जीवन का हिस्सा हैं, हम इन्हें किसी भी कीमत पर कटने नहीं देंगी।”

ग्रामीणों ने प्रशासन से पुरजोर मांग की है कि सड़क निर्माण के लिए कोई ऐसा वैकल्पिक मार्ग तलाशा जाए जिससे विकास भी हो सके और क्षेत्र के फेफड़े यानी इन पेड़ों को भी बचाया जा सके।

फिलहाल मौके पर स्थिति तनावपूर्ण है। ग्रामीणों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि प्रशासन ने जबरन पेड़ों को काटने की कोशिश की, तो इस आंदोलन को और उग्र किया जाएगा।

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हिन्दुस्थान समाचार / जितेंद्र ठाकुर

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