नीति और विज़न विहीन सुक्खू सरकार उद्योग नहीं कार्निवाल चला रही : बिक्रम ठाकुर

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नीति और विज़न विहीन सुक्खू सरकार उद्योग नहीं कार्निवाल चला रही : बिक्रम ठाकुर


धर्मशाला, 04 जनवरी (हि.स.)। पूर्व उद्योग मंत्री एवं भाजपा नेता बिक्रम ठाकुर ने हिम एमएसएमई फेस्ट को लेकर मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू पर निशाना साधा है। मुख्यमंत्री द्वारा दिए गए बयानों पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए बिक्रम ठाकुर ने कहा कि वर्तमान कांग्रेस सरकार के पास न तो कोई ठोस उद्योग नीति है और न ही प्रदेश के औद्योगिक भविष्य को लेकर कोई स्पष्ट विज़न। उन्होंने कहा कि बड़े-बड़े मंचों से भाषण देकर, उत्सव और मेले आयोजित कर सरकार अपनी नाकामियों पर पर्दा डालने का प्रयास कर रही है, जबकि सच्चाई यह है कि आज हिमाचल का उद्योग क्षेत्र गहरे संकट से गुजर रहा है।

बिक्रम ठाकुर ने कहा कि जयराम ठाकुर के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार के कार्यकाल में हिमाचल प्रदेश में उद्योगों को आकर्षित करने के लिए एक स्पष्ट और दूरदर्शी नीति लागू की गई थी। उद्योगों को करों में राहत, सब्सिडी, सस्ती बिजली, सिंगल विंडो क्लीयरेंस और समयबद्ध स्वीकृतियों जैसी सुविधाएं दी गईं, जिसके कारण प्रदेश में निवेश बढ़ा और हजारों युवाओं को रोजगार मिला। लेकिन सुक्खू सरकार ने सत्ता में आते ही उन सभी उद्योग-हितैषी प्रावधानों को या तो समाप्त कर दिया या उन्हें निष्क्रिय बना दिया, जिसके चलते आज उद्योग हिमाचल से पलायन करने को मजबूर हैं।

उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री को यह बताना चाहिए कि पिछले तीन वर्षों में कितने उद्योग बंद हुए, कितने निवेश प्रस्ताव वापस लिए गए और कितने उद्यमी दूसरे राज्यों की ओर चले गए। यदि सरकार वास्तव में एमएसएमई और स्टार्टअप को लेकर गंभीर होती, तो सबसे पहले एक नई, स्थिर और भरोसेमंद उद्योग नीति लागू की जाती। केवल ‘हिम’ ब्रांड या ‘मेड इन हिमाचल’ जैसे नारों से उद्योग नहीं चलते, उद्योग सरकार की नीयत, नीति और निरंतर सहयोग से चलते हैं, जो इस सरकार में पूरी तरह गायब है।

उन्होंने सुक्खू सरकार की कथनी और करनी में फर्क को उजागर करते हुए कहा कि जो सरकार हिमाचली संस्कृति को बढ़ावा देने की बात करती है, वही सरकार प्रदेश के सांस्कृतिक आयोजनों में बाहरी, विशेषकर पंजाबी कलाकारों पर लाखों रुपये खर्च कर रही है। हिमाचल के अपने लोक कलाकार, गायक और सांस्कृतिक दलों को पूरी तरह नजरअंदाज किया जा रहा है। यह प्रदेश की संस्कृति के साथ अन्याय है और स्थानीय कलाकारों का खुला अपमान भी।

हिन्दुस्थान समाचार / सतेंद्र धलारिया

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