वीसी नियुक्ति मामले में हिमाचल सरकार पहुंची सुप्रीम कोर्ट

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शिमला, 05 अक्टूबर (हि.स.)। कृषि, बागवानी और वानिकी विश्वविद्यालयों में कुलपतियों की नियुक्ति को लेकर हिमाचल प्रदेश सरकार ने हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। मुख्यमंत्री के प्रधान मीडिया सलाहकार नरेश चौहान ने सोमवार को यह जानकारी दी।

उन्होंने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि कुलपति नियुक्ति का मामला लंबे समय से चल रहा है और राज्य सरकार विश्वविद्यालयों को अनुदान देती है। ऐसे में नियुक्ति प्रक्रिया में सरकार की राय को भी महत्व दिया जाना चाहिए।

नरेश चौहान ने कहा कि पहले भी कुलपतियों की नियुक्तियां सरकार के प्रस्ताव और राय के साथ होती रही हैं। उन्होंने कहा कि हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ सरकार ने अपनी बात सुप्रीम कोर्ट के समक्ष रखी है। चौहान ने आरोप लगाया कि कुछ विचारधारा से जुड़े लोग शैक्षणिक संस्थानों को अपने तरीके से चलाना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालयों में कुलपतियों की नियुक्ति के मामले में सरकार की राय को महत्व मिलना चाहिए।

चौहान ने मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू के सरकार गांव के द्वार कार्यक्रम का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि कार्यक्रम को लोगों का समर्थन मिल रहा है। रोहड़ू के भटवाड़ी और रामपुर के काशापाट में मुख्यमंत्री के रात्रि प्रवास के दौरान लोगों में उत्साह देखने को मिला। उन्होंने कहा कि कई स्थानों पर लोगों ने दिवाली जैसा जश्न मनाया।

उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री लगातार लोगों के बीच जाकर उनकी समस्याएं सुन रहे हैं और विकास कार्यों पर चर्चा कर रहे हैं। सरकार गांव के द्वार कार्यक्रम के माध्यम से दूरदराज के ग्रामीण क्षेत्रों तक पहुंच रही है और लोगों से सीधे संवाद कर रही है।

जय राम ठाकुर के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए चौहान ने कहा कि केंद्र सरकार का धन्यवाद तब किया जाना चाहिए, जब हिमाचल प्रदेश की लंबित वित्तीय देनदारियों का भुगतान किया जाए। उन्होंने कहा कि आरडीजी समेत कई मांगें केंद्र सरकार के पास लंबित हैं।

चौहान ने कहा कि यदि विपक्ष के नेता जय राम ठाकुर इन लंबित मांगों को केंद्र से पूरा करवाने में सफल होते हैं तो हिमाचल सरकार को केंद्र सरकार का धन्यवाद करने में कोई आपत्ति नहीं होगी।

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हिन्दुस्थान समाचार / उज्जवल शर्मा

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