विदेश कमाने गया 23 वर्षीय जसवंत अस्पताल में जिंदगी की जंग लड़ रहा, पैसे खत्म हुए तो इलाज भी रुका

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विदेश कमाने गया 23 वर्षीय जसवंत अस्पताल में जिंदगी की जंग लड़ रहा, पैसे खत्म हुए तो इलाज भी रुका


ऊना, 28 सितंबर (हि.स.)। घर की आर्थिक स्थिति सुधारने और मां के लिए बेहतर जिंदगी का सपना लेकर विदेश गया हरोली क्षेत्र के कुठार बीत गांव का 23 वर्षीय जसवंत राय एक माह से अस्पताल के बिस्तर पर जिंदगी की जंग लड़ रहा है। रोजगार की तलाश में 18 अगस्त 2026 को अर्मेनिया गया जसवंत वहां महज 10 दिन ही काम कर पाया था कि अचानक उसे पैरालिसिस का अटैक आ गया। पिछले करीब एक माह से वह अस्पताल में उपचाराधीन है।

जसवंत के पिता का पहले ही निधन हो चुका है और परिवार में उसकी विधवा मां और छोटा भाई ही सहारा है। बेटे को विदेश भेजकर परिवार की आर्थिक स्थिति सुधारने की उम्मीद में मां ने रिश्तेदारों से पैसे उधार लेकर जसवंत को अर्मेनिया भेजा था। लेकिन विदेश पहुंचने के कुछ ही दिनों बाद आई बीमारी ने परिवार की सारी उम्मीदों को संकट में डाल दिया।

माता जसवीर कौर ने है कि जसवंत के इलाज पर अब तक करीब ढाई लाख रुपये खर्च हो चुके हैं। परिवार पहले ही विदेश भेजने के लिए कर्ज ले चुका था। ऐसे में लगातार बढ़ रहे इलाज के खर्च ने परिवार को पूरी तरह आर्थिक संकट में डाल दिया है। पैसों की कमी के चलते अस्पताल ने अब जसवंत का इलाज तक रोक दिया है। बेटे की हालत और इलाज रुकने की खबर ने विधवा मां की चिंता और बढ़ा दी है। विधवा मां ने जिस बेटे को उन्होंने परिवार का सहारा बनने की उम्मीद में विदेश भेजा था, वही आज गंभीर बीमारी से जूझ रहा है। मां के पास न तो इलाज का खर्च उठाने के लिए पैसे बचे हैं और न ही अब और कर्ज लेने की स्थिति है। रिश्तेदारों से उधार लेकर बेटे को विदेश भेजने वाली मां के सामने अब बेटे की जिंदगी बचाने के लिए मदद की दरकार है।

विधवा जसवीर कौर और स्थानीय लोगों ने उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री से जसवंत के इलाज के लिए आर्थिक सहायता उपलब्ध करवाने की गुहार लगाई है। उनका कहना है कि परिवार की बेहद कमजोर आर्थिक स्थिति को देखते हुए सरकार मानवीय आधार पर तत्काल मदद के लिए आगे आए, ताकि पैसों के अभाव में जसवंत का इलाज न रुके।

जसवंत की मां को अब सरकार और समाज से मदद की उम्मीद है। जिस बेटे को बेहतर भविष्य की आस में विदेश भेजा था, आज वही अस्पताल के बिस्तर पर जिंदगी के लिए संघर्ष कर रहा है। परिवार की बस एक ही गुहार है कि आर्थिक मदद मिल जाए, ताकि जसवंत को वापिस भारत लाया जा सके और जहाँ उसका इलाज दोबारा शुरू हो सके।

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हिन्दुस्थान समाचार / विकास कौंडल

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