ऊना में लम्पी वायरस का प्रकोप 51 पशुओं की मौत

WhatsApp Channel Join Now

ऊना, 24 सितंबर (हि.स.)। जिले में गोवंश पर जानलेवा लंपी वायरस का प्रकोप गहराने से पशुपालक भारी संकट और दहशत के साए में हैं। जिले में पिछले दो महीनों के दौरान इस जानलेवा बीमारी के कारण 51 गोधन की मौत हो चुकी है। अब तक कुल 940 पशु इस बीमारी की चपेट में आ चुके हैं। राहत की बात यह है कि पशुपालन विभाग द्वारा दिए गए समयबद्ध उपचार के बाद 661 पशु पूरी तरह स्वस्थ हो चुके हैं, जबकि 192 पशु अभी भी इस संक्रमण से जूझ रहे हैं।

हालात को लेकर पशुपालन विभाग ऊना के उप निदेशक डॉ. वीरेंद्र पटियाल का कहना है कि प्रभावित क्षेत्रों में संक्रमित पशुओं का लगातार उपचार जारी है और विभाग की टीमें मुस्तैदी से काम कर रही हैं, जिससे स्थिति अब नियंत्रण में है। वहीं दूसरी ओर, अचानक गोवंश के काल का ग्रास बनने से दुग्ध व्यवसाय पर निर्भर पशुपालकों की आजीविका को गहरा झटका लगा है। मवेशियों के नुकसान से पशुपालकों में हड़कंप मचा हुआ है और उन्होंने राज्य सरकार से प्रभावित परिवारों को तुरंत उचित वित्तीय मुआवजा व आर्थिक राहत राशि प्रदान करने की गुहार लगाई है।

लंपी वायरस, जिसे वैज्ञानिक भाषा में 'लंपी स्किन डिजीज' कहा जाता है, मुख्य रूप से कैप्रीपॉक्स वायरस से फैलने वाला एक संक्रामक रोग है। यह रोग मुख्य रूप से गायों और भैंसों को प्रभावित करता है। यह बीमारी हवा से नहीं, बल्कि मच्छरों, मक्खियों, जूओं, चिंचड़ों तथा दूषित चारे और पानी के जरिए एक पशु से दूसरे पशु में फैलती है।

इस रोग के प्रमुख लक्षणों में पशु को 2 से 3 दिनों तक लगातार तेज बुखार रहना शामिल है। इसके बाद मवेशी के सिर, गर्दन, थन, पैरों और पूरे शरीर की त्वचा पर 2 से 5 सेंटीमीटर व्यास की सख्त गांठे (नोड्यूल्स) उभर आती हैं। बीमारी के बढ़ते प्रकोप के साथ पशु के मुंह और नाक से लगातार लार व पानी बहने लगता है, आंखें सूज जाती हैं, पैरों में सूजन के कारण लंगड़ापन आ जाता है और भूख न लगने से पशु अत्यधिक कमजोर हो जाता है। इसके अलावा, संक्रमित दुधारू पशुओं के दूध उत्पादन में अचानक भारी गिरावट आ जाती है।

---------------

हिन्दुस्थान समाचार / विकास कौंडल

Share this story