हरोली में 20 करोड़ से प्राचीन टोबों का कायाकल्प
ऊना, 07 जनवरी (हि.स.)। हरोली विधानसभा क्षेत्र में जल संरक्षण, भूजल रिचार्ज और पर्यावरण संतुलन को सुदृढ़ करने की दिशा में एक अनुकरणीय पहल की जा रही है। क्षेत्र के प्राचीन तालाबों (टोबों) को पुनर्जीवित कर उन्हें आधुनिक, सुंदर एवं बहुउद्देशीय सरोवरों के रूप में विकसित किया जा रहा है, जिस पर लगभग 20 करोड़ रुपये की राशि व्यय की जा रही है। यह पहल न केवल पारंपरिक जल स्रोतों के संरक्षण की दिशा में अहम कदम है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए स्थायी जल सुरक्षा का मजबूत आधार भी तैयार कर रही है।
हरोली के विधायक एवं उप मुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री की दूरदर्शी सोच और जनहितकारी दृष्टिकोण के चलते वर्षों पुराने टोबों को नया जीवन मिल रहा है। जहां देश के अनेक हिस्से गिरते भूजल स्तर और सूखते जल स्रोतों की चुनौती से जूझ रहे हैं, वहीं हरोली में जल संरक्षण को लेकर एक सकारात्मक, दूरगामी और सतत मॉडल विकसित हो रहा है।
हरोली में तालाबों के संरक्षण और संवर्धन के प्रयास कोई नए नहीं हैं, बल्कि यह कार्य मुकेश अग्निहोत्री के पहले विधायक कार्यकाल से ही निरंतर जारी है। वर्तमान समय में इन प्रयासों को और अधिक व्यापक एवं प्रभावी रूप दिया गया है। यह मॉडल आज पूरे प्रदेश के लिए जल संरक्षण की एक प्रेरक मिसाल बनता जा रहा है।
तालाबों के चारों ओर पैदल पथ, हरियाली, सौंदर्यीकरण और स्वच्छता से जुड़े कार्य भी किए जा रहे हैं। इससे जहां एक ओर ग्रामीण क्षेत्रों में प्राकृतिक सौंदर्य और स्वस्थ जीवनशैली को बढ़ावा मिलेगा, वहीं दूसरी ओर आसपास के क्षेत्रों में गिरते भूजल स्तर को स्थिर करने में भी उल्लेखनीय सहायता मिलेगी।
जल संरक्षण हमारी सांस्कृतिक विरासत को सहेजने का संकल्प : मुकेश अग्निहोत्री
उप मुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने कहा कि हरोली में तालाबों और टोबों का पुनरुद्धार केवल एक विकासात्मक परियोजना नहीं, बल्कि हमारी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और प्राकृतिक संसाधनों को संरक्षित रखने का संकल्प है। पारंपरिक जल स्रोत आने वाले समय में जल सुरक्षा की सबसे मजबूत नींव सिद्ध होंगे। पुनर्जीवित टोबे न केवल भूजल संरक्षण और पर्यावरण संतुलन में अहम भूमिका निभाएंगे, बल्कि ग्रामीण जीवन की समृद्धि, स्वच्छता और सौंदर्य को भी नया आयाम देंगे।
जल शक्ति विभाग हरोली के अधिशाषी अभियंता पुनीत शर्मा ने बताया कि हरोली में तालाबों के सौंदर्यीकरण, जल संचयन और ग्रामीण क्षेत्रों के पानी की निकासी को एकत्रित करने के लिए जल शक्ति विभाग, वन विभाग और लोक निर्माण विभाग के संयुक्त कन्वर्जेंस के माध्यम से कार्य किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि जल शक्ति विभाग के माध्यम से लगभग 11 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं, जबकि शेष राशि अन्य विभागों के माध्यम से चरणबद्ध तरीके से खर्च की जा रही हैं।
---------------
हिन्दुस्थान समाचार / विकास कौंडल

