जरूरतमंदों का सहारा बनी श्रीराम फांउडेशन, क्षेत्र के 50 परिवारों को पांच लाख की सहायता
ऊना, 14 अप्रैल (हि.स.)। कहते हैं कि राजनीति अक्सर सत्ता और कुर्सी के इर्द-गिर्द सिमट कर रह जाती है, लेकिन हरोली की धरती पर एक नई ईबारत लिखी जा रही है। यहां राजनीति से उपजे एक विचार ने समाजसेवा का ऐसा स्वरूप धारण किया है कि आज वह दर्जनों परिवारों के लिए उम्मीद का दीया बन गया है। हम बात कर रहे हैं श्री राम फाउंडेशन की, जिसने महज़ एक साल के भीतर 50 से अधिक जरूरतमंद परिवारों का हाथ थामकर मुश्किल घड़ी में उनका साथ दिया।
गत वर्ष 2025 में जब इस संस्था की नींव रखी गई तो ध्येय राजनीति नहीं, बल्कि समाज के उस अंतिम व्यक्ति तक पहुँचना था जो अभावों के कारण हार मान चुका था। राजनीति के गलियारों में लोगों की पीड़ा को करीब से देखने के बाद यह विचार आया कि क्यों न एक ऐसा मंच तैयार किया जाए जो बिना किसी भेदभाव के सीधे जरूरतमंदों की मदद करे। इसी नेक सोच के साथ शुरूआत हुई श्री राम फाउंडेशन की। संस्था ने अपने सफर के पहले ही साल में लगभग पांच लाख रुपए की सीधी आर्थिक सहायता प्रदान की है। यह केवल एक आंकड़ा नहीं है, बल्कि उन 50 परिवारों की मुस्कान है जिन्होंने अंधेरे में रोशनी की किरण देखी है।
संस्था के अध्यक्ष सतीश कुमार छोटू बताते हैं कि वे स्वयं भी जमीन से उठे हैं और गरीब परिवार की समस्याओं को नजदीकी से देखा है। लोगों ने पंचायत प्रधान बनाया तो उनके साथ साथ जुड़ाव बढ़ा, लोगों की समस्याएं सुनी और सुलझाई जिससे समाजसेवा की भावना जगी। फिर वर्ष 2020 में जनता के आशीर्वाद इनकी धर्मपत्नी रमा ठाकुर जिला परिषद बनी। जिसके बाद लोगों का दायरा बढ़ा और ज्यादा संख्या में जरूरतमंद लोग सहायता के लिए इनके पास पहुंचने लगे। धर्मपत्नी रमा ठाकुर ने भी समाजसेवा से कभी रोका नही, बल्कि जरूरतमंद परिवारों की हर संभव मदद करने के लिए प्रेरित किया। जिससे मेरे समाजसेवा के जज्बे को और बल मिला।
संस्था के साथ 45 से अधिक सदस्य जुड़ें हैं जो कि हर माह अपनी नेक कमाई में से 500 रुपए का योगदान समाजसेवा के लिए संस्था को करते हैं। संस्था द्वारा गंभीर बीमारी से पीडि़तों, जरूरतमंद कन्याओं की शादी और शिक्षा के क्षेत्र में सहयोग किया जाता है।
उन्होंने कहा कि बिना किसी लंबी कागजी कार्यवाही के फाउंडेशन ने सीधे उन लोगों तक सहायता पहुँचाई जिन्हें इसकी सबसे अधिक आवश्यकता थी। उन्होंने कहा कि हमारा लक्ष्य केवल पैसा बांटना नहीं, बल्कि एक ऐसा समाज बनाना है जहाँ कोई भी व्यक्ति खुद को अकेला न समझे। राजनीति ने हमें लोगों से मिलना सिखाया और अब वह रिश्ता सेवा में बदल चुका है। सेवा का ये सिलसिला बिना किसी भेदभाव के आगे भी जारी रहेगा।
श्रीमद् भागवद कथा से हुई शुरूआत
सतीश ठाकुर ने बताया कि 2025 में ही गांव स्तर पर धार्मिक सम्मेलन श्रीमद् भागवद कथा का आयोजन करवाया गया था। जहां युवा साथियों ने समाजसेवा को आगे बढ़ाते हुए श्रीराम फांउडेशन का गठन किया और हर माह 500 रुपए सहयोग करने की भी बात कही। तब से संस्था द्वारा समाजसेवा का कार्य जारी है।
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हिन्दुस्थान समाचार / विकास कौंडल

