चिंतपूर्णी में प्रशासनिक इंतजाम फेल, रविवार को भारी भीड़ से चरमराई व्यवस्था
ऊना, 16 अगस्त (हि.स.)। सावन मेले के दौरान मां चिंतपूर्णी के दरबार में उमड़ रही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ के बीच चरमराती व्यवस्थाओं को लेकर स्वामी विवेकानंद सेवा ट्रस्ट चिंतपूर्णी के अध्यक्ष गौरव कुमार ने प्रशासन के विरुद्ध कड़ा रोष दर्ज करवाया है। उन्होंने कहा कि श्रद्धालुओं को व्यवस्था चाहिए, बहाने नहीं। गौरव कुमार ने कहा कि सावन मेले में श्रद्धालुओं की भारी संख्या को देखते हुए प्रशासन द्वारा बड़े-बड़े दावे किए गए थे, लेकिन चार नवरात्रों में ही प्रशासन की तैयारियों और व्यवस्थाओं की पोल खुलती दिखाई दे रही है। जगह-जगह यातायात जाम, अव्यवस्थित भीड़ और कतारों के टूटने से श्रद्धालुओं को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
उन्होंने कहा कि सबसे गंभीर चिंता का विषय यह है कि एंबुलेंस तक जाम में फंसने की स्थिति सामने आ रही है। अगर आपातकालीन वाहन ही समय पर अपने गंतव्य तक नहीं पहुंच पाएंगे, तो प्रशासन द्वारा की गई व्यवस्थाओं की गंभीरता का अंदाजा लगाया जा सकता है।
गौरव कुमार ने डीसी ऊना और एसडीएम अंब से सवाल करते हुए कहा कि जब सावन मेले के दौरान श्रद्धालुओं की भारी भीड़ की जानकारी प्रशासन को पहले से थी, तो फिर ऐसी स्थिति क्यों पैदा हुई? क्या मेले से पहले बनाए गए ट्रैफिक और भीड़ प्रबंधन प्लान को जमीन पर लागू किया गया या सिर्फ बैठकों और कागजों तक सीमित रखा गया?
उन्होंने कहा कि मां चिंतपूर्णी का दरबार लाखों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। यहां आने वाला श्रद्धालु प्रशासन की अव्यवस्था, धक्कामुक्की और घंटों के जाम से परेशान होने के लिए नहीं आता। बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों की परेशानी को देखते हुए प्रशासन को तत्काल प्रभाव से ठोस कदम उठाने चाहिए।
गौरव कुमार ने कहा कि प्रशासन को वीआईपी मूवमेंट और औपचारिकताओं से ऊपर उठकर आम श्रद्धालु की सुविधा को प्राथमिकता देनी होगी। मौके पर वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी बढ़ाई जाए, यातायात व्यवस्था को तत्काल दुरुस्त किया जाए, बैरिकेडिंग एवं कतार व्यवस्था को मजबूत किया जाए और एंबुलेंस समेत सभी आपातकालीन वाहनों के लिए निर्बाध रास्ता सुनिश्चित किया जाए।
उन्होंने कहा कि डीसी साहब और एसडीएम साहब को अब बैठकों में नहीं, जमीन पर उतरकर व्यवस्था दिखानी होगी। श्रद्धालु मां का आशीर्वाद लेने आते हैं, प्रशासन की नाकामी भुगतने नहीं। चार नवरात्रों में ही अगर व्यवस्थाओं की यह हालत है, तो आगे की भीड़ को प्रशासन किस तरह संभालेगा, यह बड़ा सवाल है।
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हिन्दुस्थान समाचार / विकास कौंडल

