शिमला में ट्विन टनल निर्माण से सैकड़ों घरों पर खतरे का दावा, प्रभावितों ने मांगा उचित मुआवजा

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शिमला, 06 अक्टूबर (हि.स.)। राजधानी शिमला में एनएचएआई के फोरलेन प्रोजेक्ट के तहत निर्माणाधीन ट्विन टनल को लेकर संजौली, शांतिविहार, भट्टाकुफ़र, ढली और चलौंठी क्षेत्रों के प्रभावित परिवारों में चिंता बनी हुई है। प्रभावित परिवारों का कहना है कि टनल निर्माण के कारण कई घरों में दरारें आने लगी हैं। उनका दावा है कि यदि निर्माण कार्य इसी तरह जारी रहा तो आने वाले समय में सैकड़ों घरों की सुरक्षा पर गंभीर खतरा पैदा हो सकता है। प्रभावितों का कहना है कि वे विकास के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन अपने घरों की कीमत पर विकास नहीं चाहते।

मंगलवार को मीडिया से बातचीत में प्रभावित परिवारों ने आरोप लगाया कि टनल निर्माण शुरू होने से पहले उन्हें परियोजना और इससे जुड़े संभावित प्रभावों के बारे में उचित जानकारी नहीं दी गई। उनका कहना है कि निर्माण कार्य के दौरान उनके घरों को नुकसान पहुंचने की स्थिति बनी है। प्रभावित परिवारों के अनुसार अब तक उन्हें उचित मुआवजा भी नहीं मिला है। उनका दावा है कि करीब डेढ़ साल से कई लोगों को अपने घरों से बाहर रहना पड़ रहा है।

प्रभावित परिवारों और स्थानीय लोगों ने इस मामले को उठाने के लिए ट्विन टनल संघर्ष समिति का गठन किया है। समिति की ओर से प्रभावित परिवारों की समस्याओं और टनल निर्माण से जुड़े सुरक्षा संबंधी मुद्दों को सामने रखा जा रहा है। प्रभावितों का कहना है कि सड़क और अन्य विकास परियोजनाएं जरूरी हैं, लेकिन इनके निर्माण के दौरान स्थानीय लोगों के घरों और जान-माल की सुरक्षा का भी ध्यान रखा जाना चाहिए।

प्रभावितों ने बताया कि इसी बीच सुप्रीम कोर्ट की ओर से मामले पर संज्ञान लिया गया है। सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित हाई पावर कमेटी ने शिमला में एनएचएआई के इस प्रोजेक्ट का मौके पर निरीक्षण किया। कमेटी ने विभिन्न प्रभावित क्षेत्रों का दौरा किया और वहां की स्थिति का जायजा लिया। इस दौरान टीम ने प्रभावित परिवारों से भी मुलाकात की और उनकी समस्याएं तथा चिंताएं सुनीं।

प्रभावित परिवारों के अनुसार हाई पावर कमेटी ने उन्हें भरोसा दिलाया है कि पूरे मामले को लेकर हाई कोर्ट को रिपोर्ट सौंपी जाएगी। कमेटी के मौके पर पहुंचने और प्रभावितों की समस्याएं सुनने के बाद लोगों को अपने घरों और जान-माल की सुरक्षा से जुड़े मुद्दों के समाधान की उम्मीद जगी है। प्रभावित परिवारों का कहना है कि वे विकास कार्यों का विरोध नहीं कर रहे हैं, लेकिन निर्माण के दौरान उनके घरों की सुरक्षा और उनके हितों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

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हिन्दुस्थान समाचार / उज्जवल शर्मा

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