शिमला में टैक्सी ऑपरेटरों का अनशन खत्म, जयराम ठाकुर ने जूस पिलाकर तुड़वाया

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शिमला में टैक्सी ऑपरेटरों का अनशन खत्म, जयराम ठाकुर ने जूस पिलाकर तुड़वाया


शिमला, 28 अगस्त (हि.स.)। हिमाचल प्रदेश में व्यावसायिक वाहनों के परमिट की अवधि 12 से बढ़ाकर 15 साल करने की मांग को लेकर शिमला के चौड़ा मैदान में चल रहा टैक्सी ऑपरेटरों का आंदोलन शुक्रवार को समाप्त हो गया। पूर्व मुख्यमंत्री एवं नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने धरनास्थल पर पहुंचकर आमरण अनशन पर बैठे ऑपरेटरों से बातचीत की और उनकी मांगों को सुना। मांगों पर हरसंभव पैरवी का भरोसा देने के बाद उन्होंने ऑपरेटरों को जूस पिलाकर अनशन समाप्त करवाया।

जयराम ठाकुर ने कहा कि टैक्सी ऑपरेटरों की परमिट अवधि बढ़ाने का मामला केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी के सामने उठाया जाएगा। उन्होंने बताया कि इस संबंध में उनकी गुरुवार शाम नितिन गडकरी से फोन पर बातचीत हुई है। जयराम ठाकुर के अनुसार केंद्रीय मंत्री ने कहा है कि हिमाचल प्रदेश से संबंधित कोई फाइल उनके पास आती है तो उस पर एक घंटे के भीतर उचित निर्णय किया जाएगा।

जयराम ठाकुर से बातचीत के बाद टैक्सी ऑपरेटरों ने आंदोलन समाप्त करने पर सहमति जताई। टैक्सी-मैक्सी ऑपरेटर एसोसिएशन मनाली के अध्यक्ष अभी ठाकुर ने कहा कि उनकी मुख्य मांग व्यावसायिक वाहनों के परमिट की अवधि 12 साल से बढ़ाकर 15 साल करना है।

ऑपरेटरों का कहना है कि पहाड़ी क्षेत्रों में चलने वाले कई वाहन 12 साल पूरे होने के बाद भी फिट होते हैं। कई वाहनों का उपयोग भी अपेक्षाकृत कम हुआ होता है। मौजूदा नियमों के कारण परमिट अवधि पूरी होने के बाद ऐसे वाहनों को सड़क पर चलाने की अनुमति नहीं मिलती। इससे वाहन मालिकों के सामने आर्थिक संकट पैदा हो जाता है। उनका कहना है कि कई लोगों ने वाहन खरीदने में लाखों रुपये लगाए हैं और परिवार की आय इसी कारोबार पर निर्भर है।

ऑपरेटरों की मांग है कि वाहन की उम्र के साथ उसकी फिटनेस को भी महत्व दिया जाए। यदि कोई व्यावसायिक वाहन निर्धारित फिटनेस मानकों पर खरा उतरता है तो उसे परमिट अवधि पूरी होने के बाद भी चलाने की अनुमति देने पर विचार किया जाना चाहिए।

जयराम ठाकुर ने कहा कि उन्होंने विधानसभा के मानसून सत्र में भी टैक्सी ऑपरेटरों की इस मांग को सरकार के सामने उठाया है। उन्होंने कहा कि यह केवल टैक्सी कारोबार से जुड़ा मामला नहीं है, इससे हजारों परिवारों की आजीविका जुड़ी है। सरकार को वाहन मालिकों की व्यावहारिक दिक्कतों को देखते हुए इस मामले में सकारात्मक निर्णय लेना चाहिए।

ऑपरेटरों ने टैक्सी वाहनों के साथ बस, ट्रक, ऑटो, मालवाहक और अन्य व्यावसायिक वाहनों के परमिट से जुड़े नियमों में बदलाव की भी मांग की है। उनका कहना है कि अन्य राज्यों में निर्धारित अवधि पूरी होने के बाद फिटनेस के आधार पर वाहनों को चलाने की अनुमति देने की व्यवस्था है। हिमाचल में भी ऐसी व्यवस्था लागू करने पर विचार किया जाना चाहिए।

ऑपरेटरों का कहना है कि पहाड़ी राज्य में नया वाहन खरीदना आसान नहीं है। वाहन खरीदने में बड़ी रकम खर्च होती है और कई परिवारों की रोजी-रोटी इसी से जुड़ी होती है। ऐसे में फिट वाहन को केवल निर्धारित आयु पूरी होने के कारण सड़क से हटाना उनके लिए आर्थिक परेशानी का कारण बनता है।

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हिन्दुस्थान समाचार / उज्जवल शर्मा

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