शिक्षकों को कला और विरासत से जोड़ने की पहल, दिल्ली में होगा 21 दिन का प्रशिक्षण

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शिमला, 18 सितंबर (हि.स.)। हिमाचल प्रदेश के सरकारी स्कूलों में पढ़ाने वाले शिक्षकों को कला और सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने के लिए 21 दिन का प्रशिक्षण दिया जाएगा। यह ओरिएंटेशन कोर्स 23 सितंबर से 14 अक्तूबर तक नई दिल्ली के द्वारका में आयोजित होगा। केंद्र सरकार के संस्कृति मंत्रालय के अधीन सैंटर फॉर कल्चरल रिसोर्सेज एंड ट्रेनिंग (सीसीआरटी) की ओर से आयोजित इस प्रशिक्षण में शिमला जिले के सरकारी स्कूलों के पात्र शिक्षकों को भेजा जाएगा।

शिक्षा विभाग ने जिले के सभी कॉम्प्लेक्स स्कूलों के प्रधानाचार्यों और मुख्याध्यापकों से पात्र शिक्षकों के नाम मांगे हैं। प्रत्येक स्कूल से केवल एक शिक्षक का नाम भेजा जा सकेगा। संबंधित स्कूलों को शिक्षक का विवरण और नामांकन स्वीकृति प्रपत्र 20 सितंबर तक शिक्षा विभाग के कार्यालय में जमा करवाना होगा। इसके बाद अंतिम सूची तैयार कर सीसीआरटी को भेजी जाएगी। प्रशिक्षण के लिए 52 वर्ष तक की आयु वाले शिक्षक पात्र होंगे और पंजीकरण के समय जन्मतिथि का प्रमाण देना होगा। शिक्षक का कक्षा छठी से 12वीं तक पढ़ाने वाला होना जरूरी है। न्यूनतम दो वर्ष का शिक्षण अनुभव रखने वाले शिक्षकों को प्राथमिकता दी जाएगी।

इस प्रशिक्षण में सामाजिक अध्ययन, भाषाओं, विज्ञान, गणित, वाणिज्य, ललित कला, संगीत और कला विषय पढ़ाने वाले शिक्षक शामिल हो सकते हैं। सीसीआरटी के अनुसार, जो शिक्षक पहले सीसीआरटी का ओरिएंटेशन कोर्स कर चुके हैं या सितंबर 2025 के बाद सीसीआरटी के किसी प्रशिक्षण कार्यक्रम में शामिल हुए हैं, वे पात्र नहीं होंगे। ऐसे मामलों में कम से कम एक वर्ष का अंतर होना जरूरी है। प्रधानाचार्य, मुख्याध्यापक, स्कूल निरीक्षक और प्राथमिक शिक्षक को प्रशिक्षण के लिए नामित नहीं किया जा सकेगा। शारीरिक शिक्षा और योग शिक्षक, लाइब्रेरियन, लैब असिस्टेंट, दृष्टिबाधित शिक्षक तथा अनुबंध, एडहॉक या अस्थायी आधार पर कार्यरत शिक्षक भी इसके लिए पात्र नहीं होंगे। प्रशिक्षण में शामिल शिक्षकों के प्रशिक्षण खर्च और यात्रा भत्ते का भुगतान सीसीआरटी की ओर से किया जाएगा।

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हिन्दुस्थान समाचार / उज्जवल शर्मा

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