कांग्रेस मंत्री की आरएसएस पर टिप्पणी दुर्भाग्यपूर्ण, माफी मांगें : सूरत नेगी

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कांग्रेस मंत्री की आरएसएस पर टिप्पणी दुर्भाग्यपूर्ण, माफी मांगें : सूरत नेगी


कांग्रेस मंत्री की आरएसएस पर टिप्पणी दुर्भाग्यपूर्ण, माफी मांगें : सूरत नेगी


शिमला, 30 नवंबर (हि.स.)। भाजपा के सह मीडिया प्रभारी, किन्नौर से पूर्व प्रत्याशी व वन विकास निगम अध्यक्ष रहे सूरत नेगी ने कहा है कि हिमाचल विधानसभा में कांग्रेस मंत्री जगत सिंह नेगी द्वारा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) पर की गई टिप्पणियाँ पूरी तरह गलत, तथ्यहीन और दुर्भावनापूर्ण हैं। उन्होंने कड़े शब्दों में इन बयानों की निंदा करते हुए कहा कि मंत्री जगत सिंह नेगी तुरंत सार्वजनिक रूप से देशवासियों और संघ के करोड़ों स्वयंसेवकों से माफी मांगें।

सूरत नेगी ने रविवार को एक बयान में कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का 1925 से 2025 तक का 100 वर्षों का इतिहास विश्वभर के लिए प्रेरणा का स्रोत है। उन्होंने कहा कि देश का ऐसा कोई कोना नहीं है जहां संघ के स्वयंसेवकों ने चरित्र निर्माण, सामाजिक समरसता, सेवा और राष्ट्र समर्पण की भावना से समाज को दिशा न दी हो। उन्होंने कहा कि 1962 के युद्ध से लेकर आपातकाल और प्राकृतिक आपदाओं तक हर संकट में संघ के स्वयंसेवक सबसे पहले आगे आए हैं। ऐसे संगठन पर अपमानजनक टिप्पणी करना कांग्रेस नेताओं की संकीर्ण और नकारात्मक सोच को दर्शाता है।

उन्होंने कहा कि पिछले 14 वर्षों से “राष्ट्र प्रथम” की सोच वाली सरकार देश को वैश्विक मंच पर नई पहचान दे रही है। हजारों स्वयंसेवकों ने राष्ट्र सेवा के लिए अपना जीवन समर्पित किया है। ऐसे में विधानसभा जैसी संवैधानिक जगह पर संघ का अपमान करना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण और लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है।

सूरत नेगी ने मुख्यमंत्री से भी आग्रह किया कि जिन मंत्रियों की सोच इस स्तर की हो, उन्हें मंत्री पद पर बने रहने का अधिकार नहीं है। उन्होंने कहा कि ऐसे व्यक्ति समाज को गुमराह करते हैं और लोकतांत्रिक परंपराओं को कमजोर करते हैं।

उन्होंने दावा किया कि मंत्री जगत सिंह नेगी महिलाओं के सम्मान की बात तो करते हैं, लेकिन उनके अपने घर में घरेलू हिंसा के गंभीर आरोप लगे हैं। उन्होंने कहा कि मंत्री की बहू ने किन्नौर जिला न्यायालय में मंत्री के पुत्र पर मामला दर्ज करवाया है, जिसमें यह आरोप शामिल है कि मंत्री की मौजूदगी में उनके साथ मारपीट की गई, गला दबाने का प्रयास किया गया और जान से मारने की धमकी दी गई। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि मामला न्यायालय में दर्ज है, तो अब तक गिरफ्तारियां क्यों नहीं हुईं? क्या इसका कारण राजनीतिक दबाव है?

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हिन्दुस्थान समाचार / उज्जवल शर्मा

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