शिमला में कूड़े के ढेर, सड़कों पर बंदरों-कुत्तों का जमावड़ा, 40 सफाई कर्मचारी बर्खास्त
शिमला, 20 मई (हि.स.)। हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला इन दिनों सिर्फ गर्मी या पर्यटन की वजह से चर्चा में नहीं है। शहर की सड़कों, बाजारों और गलियों में फैले कूड़े के ढेर अब लोगों की परेशानी बन गए हैं। छह दिन से जारी सफाई कर्मचारियों की हड़ताल के बीच नगर निगम ने 40 कर्मचारियों की सेवाएं समाप्त कर दी हैं। इसके बाद टकराव और बढ़ता दिखाई दे रहा है।
शिमला में सुबह-सुबह घर-घर से कूड़ा उठाने वाले सैहब सोसायटी के सफाई कर्मी नहीं पहुंच रहे। मॉल रोड, रिज, लोअर बाजार, संजौली, लक्कड़ बाजार, छोटा शिमला और टूटीकंडी जैसे इलाकों में कूड़ा जमा होता जा रहा है। कई जगहों पर बदबू फैलने लगी है और कूड़े के ढेरों के आसपास बंदरों और आवारा कुत्तों की आवाजाही बढ़ गई है। पर्यटक भी शहर की इस हालत को देखकर हैरानी जता रहे हैं।
करीब 32 किलोमीटर के दायरे में फैले शिमला शहर में पिछले छह दिनों से डोर-टू-डोर गारबेज कलेक्शन लगभग ठप पड़ा है। सैहब सोसाइटी से जुड़े करीब 800 सफाई कर्मचारी 10 प्रतिशत वार्षिक वेतन बढ़ोतरी बहाल करने की मांग को लेकर अनिश्चितकालीन हड़ताल पर हैं। कर्मचारियों का कहना है कि साल की शुरुआत में उनकी वेतन वृद्धि रोक दी गई थी और 12 हजार रुपये महीने में परिवार चलाना मुश्किल हो गया है।
इसी बीच जिला प्रशासन ने सफाई व्यवस्था को जरूरी सेवा मानते हुए एस्मा लागू कर रखा है। नगर निगम प्रशासन का कहना है कि इसके बावजूद कर्मचारी काम पर नहीं लौटे, जिसके बाद 40 कर्मचारियों की सेवाएं समाप्त करने का फैसला लिया गया। नगर निगम शिमला के आयुक्त भूपेंद्र अत्री ने हड़ताली लगभग 40 कर्मचारियों की बर्खास्तगी की पुष्टि की है।
इस बीच, निगम प्रशासन की इस कार्रवाई के बाद मामला और गर्मा गया है। सीटू के प्रदेश अध्यक्ष विजेंद्र मेहरा ने चेतावनी दी है कि यदि किसी भी मजदूर, सुपरवाइजर या सफाई कर्मचारी को नौकरी से निकाला गया तो आंदोलन और उग्र होगा। उन्होंने कहा कि राजभवन और सचिवालय मार्च निकाला जाएगा, जेल भरो आंदोलन होगा, रास्ता रोको और चक्का जाम जैसे कार्यक्रम किए जाएंगे। उन्होंने यह भी कहा कि आंदोलन को मॉल रोड की ओर मोड़ा जाएगा।
मेहरा ने नगर निगम प्रशासन पर दमनात्मक रवैया अपनाने का आरोप लगाया और कहा कि अभी भी समय है कि प्रशासन बातचीत के जरिए समाधान निकाले और कर्मचारियों की 10 प्रतिशत वेतन बढ़ोतरी बहाल करे।
उधर नगर निगम प्रशासन शहर की सफाई व्यवस्था को संभालने के लिए वैकल्पिक इंतजाम करने में जुटा है। सफाई व्यवस्था को आउटसोर्स करने की तैयारी भी की जा रही है। हालांकि, हड़ताली कर्मचारी इसका विरोध कर रहे हैं। उनका कहना है कि पहले भी ऐसी कोशिशें सफल नहीं हुई थीं।
इस हड़ताल को अब दूसरे संगठनों का भी समर्थन मिलने लगा है। माकपा, होटल यूनियन, रेहड़ी-फड़ी तहबाजारी यूनियन, आंगनबाड़ी, मिड डे मील, भवन एवं सड़क निर्माण यूनियन, एसएफआई, डीवाईएफआई, हिमाचल किसान सभा और पेंशनर एसोसिएशन समेत कई संगठनों ने कर्मचारियों के समर्थन में मैदान में उतरने का ऐलान किया है।
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हिन्दुस्थान समाचार / उज्जवल शर्मा

