शिमला में सफाई संकट गहराया, मेयर का हड़ताली कर्मचारियों को 10 फीसदी वेतन बढ़ोतरी का भरोसा

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शिमला, 16 मई (हि.स.)। राजधानी शिमला में सफाई कर्मचारियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल के कारण शहर की स्वच्छता व्यवस्था पर संकट गहराने लगा है। सैहब सोसाइटी के तहत कार्यरत सफाई कर्मचारियों की हड़ताल दूसरे दिन भी जारी रही, जिसके चलते घरों और बाजारों से कूड़ा नहीं उठ पाया। शहर के कई इलाकों में कूड़े के ढेर लगने शुरू हो गए हैं और लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

स्थिति को संभालने के लिए नगर निगम शिमला ने वैकल्पिक व्यवस्था लागू करते हुए सभी वार्डों में फोकल प्वाइंट बनाए हैं। इन स्थानों से गाड़ियों के माध्यम से कूड़ा उठाने का काम किया जा रहा है। नगर निगम प्रशासन का कहना है कि शहरवासियों का भी सहयोग मिल रहा है, लेकिन लगातार बढ़ते कचरे के कारण चुनौती बनी हुई है।

इस बीच नगर निगम शिमला के मेयर सुरेंद्र चौहान ने सफाई कर्मचारियों से काम पर लौटने की अपील की है। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों की 10 प्रतिशत वेतन बढ़ोतरी की मांग पर फैसला नगर निगम की एजीएम में ही लिया जा सकता है और इसमें कुछ समय लगेगा। उन्होंने कहा कि नगर निगम ने कर्मचारियों के हित में कई कदम उठाए हैं। निगम के इतिहास में पहली बार कर्मचारियों के लिए 30 लाख रुपये तक का बीमा करवाया गया है। इसके अलावा दिवाली बोनस को बढ़ाकर 2000 रुपये किया गया है और कर्मचारियों को मिलने वाले अवकाश भी बढ़ाए गए हैं।

मेयर ने कहा कि आचार संहिता खत्म होने के बाद वेतन बढ़ोतरी के मुद्दे पर विचार किया जाएगा। उन्होंने कर्मचारियों से शहरहित में हड़ताल खत्म कर काम पर लौटने की अपील की।

उधर, सैहब सोसायटी के कर्मचारी बीते शुक्रवार से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर हैं। कर्मचारियों के हड़ताल पर जाने से पहले जिला प्रशासन ने एस्मा लागू कर दिया था। सैकड़ों सफाई कर्मियों की सामूहिक हड़ताल से शहर की सफाई व्यवस्था प्रभावित हुई है। लगातार दूसरे दिन करीब 60 हजार घरों और व्यावसायिक संस्थानों से कूड़ा नहीं उठ पाया। निगम प्रशासन ने हड़ताल से निपटने के लिए वैकल्पिक इंतजाम किए हैं, लेकिन मौजूदा स्थिति में वे पर्याप्त साबित नहीं हो रहे हैं।

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हिन्दुस्थान समाचार / उज्जवल शर्मा

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