इतिहास हमें अपनी जड़ों से जोड़ता है और भविष्य के लिए दिशा प्रदान करता है : आचार्य ललित कुमार अवस्थी

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इतिहास हमें अपनी जड़ों से जोड़ता है और भविष्य के लिए दिशा प्रदान करता है : आचार्य ललित कुमार अवस्थी


मंडी, 19 मार्च (हि.स.)। भारतीय नव संवत्सर केवल एक तिथि का परिवर्तन नहीं बल्कि सृष्टि, प्रकृति और मानव जीवन के समन्वित नवोदय का प्रतीक है। हमारा इतिहास केवल अतीत का वर्णन नहीं करता बल्कि वह हमें अपनी जड़ों से जोड़ता है और भविष्य के लिए दिशा प्रदान करता है। भारतीय नव संवत्सर हमें यह स्मरण कराता है कि समय एक सृजन, संरक्षण और परिवर्तन का सतत प्रवाह का चक्र है। इसी भावना के साथ हमें अपने जीवन और कार्यों में नव ऊर्जा और नव दृष्टि का समावेश करना चाहिए। विश्वविद्यालय के कुलगुरु आचार्य डॉ. ललित कुमार अवस्थी ने मंडी नगर की स्थापना के 500 वर्षों की ऐतिहासिक यात्रा के विशेष अवसर पर भारतीय ज्ञान परंपरा के प्रति समर्पित सरदार पटेल विश्वविद्यालय के इतिहास विभाग एवं इतिहास सोसाइटी द्वारा नव संवत्सर अभिनन्दनम् कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि शिरकत की।

उन्होंने भारतीय कालगणना की वैज्ञानिकता, ऋतु-आधारित संरचना तथा वैश्विक प्रासंगिकता पर प्रकाश डालते हुए विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे भारतीय ज्ञान परंपरा के अध्ययन को आधुनिक संदर्भों से जोड़कर आगे बढ़ाएँ। कार्यक्रम का विषय भारतीय नव संवत्सर और कालगणना रखा गया, जिसमें भारतीय समय-परम्परा की वैज्ञानिकता, ऐतिहासिकता और सांस्कृतिक चेतना पर व्यापक विमर्श हुआ।

आचार्य डॉ. ललित कुमार अवस्थी ने विद्यार्थियों को श्रीमद्भगवद्गीता के अध्ययन के लिए प्रेरित करते हुए कहा कि गीता केवल एक धार्मिक ग्रंथ या अनुवाद मात्र नहीं है बल्कि यह जीवन को समझने और उसे सार्थक ढंग से जीने की अद्भुत कला प्रदान करती है।

कुलपति महोदय ने भारतीय नव संवत्सर एवं चैत्र नवरात्रि की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि यह पर्व प्रकृति और मानव जीवन के नवोत्थान का प्रतीक है। मंडी की ऐतिहासिक विरासत का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा भारतीय नव वर्ष के इस अवसर पर हमें मंडी की गौरवशाली 500 वर्षों की ऐतिहासिक यात्रा पर भी गर्व करना चाहिए। यह भूमि भारतीय संस्कृति, आध्यात्मिक परम्परा और ज्ञान की निरंतरता का जीवंत केंद्र रही है।

उन्होंने कहा कि भारतीय पंचांग खगोलीय गणनाओं पर आधारित है, जो हमारे पूर्वजों की वैज्ञानिक दक्षता का प्रमाण है। “इतिहास केवल अतीत का वर्णन नहीं करता, बल्कि हमें अपनी जड़ों से जोड़कर भविष्य की दिशा भी प्रदान करता है,” उन्होंने विद्यार्थियों से भारतीय ज्ञान परम्परा के गहन अध्ययन का आह्वान करते हुए कहा।

इतिहास विभागाध्यक्ष डॉ. राकेश कुमार शर्मा ने अपने संबोधन में भारतीय कालगणना को वैज्ञानिक दृष्टि से महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि यह प्रणाली खगोलीय गणनाओं और प्रकृति के चक्रों पर आधारित है, जो भारतीय मनीषा की उत्कृष्ट उपलब्धि है।

अध्यक्षीय संदेश देते हुए डॉ. राजेश कुमार शर्मा ने विद्यार्थियों को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ने तथा इतिहास के माध्यम से समसामयिक समाज को समझने की प्रेरणा दी।

कार्यक्रम के अंतर्गत विभिन्न प्रतियोगिताओं के विजेताओं को मुख्यातिथि द्वारा पुरस्कृत किया गया। निर्णायक मंडल में विकेश कुमार व कृष्ण चंद रहे। प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता में भुबनेश्वर व होमेश प्रथम व मनीष व मनीषा द्वितीय स्थान पर रहे। पोस्टर लेखन प्रतियोगिता में रक्षा प्रथम,सुनीता द्वितीय व वंदना तृतीय स्थान पर रहीं। भाषण प्रतियोगिता में सुहानी, मनीषा व आंचल क्रमशःप्रथम, द्वितीय व तृतीय स्थान पर रहीं।

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हिन्दुस्थान समाचार / मुरारी शर्मा

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