डिग्री के साथ संवाद कौशल, परिस्थितियों के अनुसार स्वयं को ढालने की क्षमता आवश्यक: प्रो. ललित अवस्थी

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डिग्री के साथ संवाद कौशल, परिस्थितियों के अनुसार स्वयं को ढालने की क्षमता आवश्यक: प्रो. ललित अवस्थी


डिग्री के साथ संवाद कौशल, परिस्थितियों के अनुसार स्वयं को ढालने की क्षमता आवश्यक: प्रो. ललित अवस्थी


मंडी, 15 अक्टूबर (हि.स.)। एसपीयू में करियर मार्गदर्शन, रोजगार से जुड़ाव एवं महिला सशक्तिकरण विषय पर एक कार्यक्रम आयोजित

सरदार पटेल विश्वविद्यालय, मंडी में करियर मार्गदर्शन, रोजगार से जुड़ाव एवं महिला सशक्तिकरण विषय पर एक कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को करियर के नए अवसरों, रोजगार के लिए आवश्यक कौशल, स्वरोजगार, उद्यमिता तथा महिला सशक्तिकरण के प्रति जागरूक करना था। कार्यक्रम में संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय, वाराणसी के कुलपति प्रोफेसर बिहारी लाल शर्मा बतौर मुख्य अतिथि उपस्थित रहे। जबकि सरदार पटेल विश्वविद्यालय, मंडी के कुलपति प्रोफेसर ललित कुमार अवस्थी ने विशिष्ट अतिथि के रूप में शिरकत की। विश्वविद्यालय के कुलसचिव शशि पाल नेगी विशेष अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।

इस अवसर पर कुलपति ललित कुमार अवस्थी ने भारत के पूर्व राष्ट्रपति एवं महान वैज्ञानिक डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम की जयंती का उल्लेख करते हुए कहा कि उनका जीवन विद्यार्थियों को बड़े सपने देखने, नई सोच विकसित करने और राष्ट्र निर्माण में योगदान देने की प्रेरणा देता है।

उन्होंने 15 अक्टूबर को मनाए जाने वाले अंतरराष्ट्रीय ग्रामीण महिला दिवस के महत्त्व पर भी प्रकाश डाला। वहीं ग्रामीण महिलाओं के योगदान को पहचानने और उनके लिए विकास के अधिक अवसर उपलब्ध कराने की आवश्यकता पर बल दिया।

प्रोफेसर अवस्थी ने कहा कि तेजी से बदलते तकनीकी और आर्थिक परिवेश में विश्वविद्यालयों की जिम्मेदारी केवल विद्यार्थियों को किताबी ज्ञान देना नहीं है, बल्कि उन्हें व्यावहारिक कौशल, सही करियर मार्गदर्शन और रोजगार के लिए आवश्यक योग्यताओं से भी लैंस करना है।

उन्होंने कहा कि आज के समय में डिग्री के साथ-साथ संवाद कौशल, डिजिटल तकनीक का ज्ञान, तार्किक सोच, टीम में काम करने की क्षमता, समस्याओं का समाधान करने की योग्यता और बदलती परिस्थितियों के अनुसार स्वयं को ढालने की क्षमता भी आवश्यक है।

इस अवसर पर उन्होंने सरदार पटेल विश्वविद्यालय में विद्यार्थियों को करियर संबंधी मार्गदर्शन और रोजगार के अवसरों से जोड़ने के लिए स्थापित प्लेसमेंट सेल तथा इन्क्यूबेशन सेंटर की भूमिका का उल्लेख किया।

महिला सशक्तिकरण पर अपने विचार रखते हुए उन्होंने कहा कि किसी भी समाज का वास्तविक विकास तभी संभव है, जब महिलाओं को शिक्षा, रोजगार, नेतृत्व, अनुसंधान और उद्यमिता के समान अवसर प्राप्त हों।

मुख्य अतिथि प्रोफेसर बिहारी लाल शर्मा ने अपने संबोधन में मंडी, जिसे छोटी काशी के नाम से जाना जाता है, और वाराणसी, जिसे काशी के नाम से जाना जाता है, के बीच सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक समानता का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि दोनों ही स्थान भारत की समृद्ध सांस्कृतिक और ज्ञान परंपरा के प्रतीक हैं।

प्रोफेसर शर्मा ने शिक्षक की भूमिका और विद्यार्थियों के प्रति उसके दायित्वों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि शिक्षण संस्थानों को विद्यार्थियों में ज्ञान के साथ-साथ आत्मविश्वास, अच्छे संस्कार और सामाजिक जिम्मेदारी की भावना विकसित करनी चाहिए।

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हिन्दुस्थान समाचार / मुरारी शर्मा

Livevns.news Desk
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