केंद्रीय मंत्री से उठाया जाएगा शांति विहार टनल प्रभावितों का मुद्दा : सुरेश कश्यप

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केंद्रीय मंत्री से उठाया जाएगा शांति विहार टनल प्रभावितों का मुद्दा : सुरेश कश्यप


शिमला, 01 अक्टूबर (हि.स.)। शिमला के संजौली स्थित शांति विहार में निर्माणाधीन चलौंठी-भट्टाकुफर ट्विन टनल से प्रभावित लोगों का मामला सांसद सुरेश कश्यप केंद्रीय मंत्री और उच्च अधिकारियों के समक्ष उठाएंगे। शांति विहार सामुदायिक भवन में वीरवार को आयोजित बैठक में स्थानीय लोगों ने टनल के सर्वे, एलाइनमेंट, भवनों में दरारों, सुरक्षा और मुआवजे से जुड़े सवाल सांसद के सामने रखे।

बैठक में स्थानीय लोगों ने दावा किया कि परियोजना का काम पहले किए गए सर्वे के अनुरूप नहीं हो रहा है। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि पुराने सर्वे या टनल के एलाइनमेंट में बदलाव किया गया है तो इसकी वजह स्पष्ट की जानी चाहिए। लोगों ने क्षेत्र की भौगोलिक और भूगर्भीय स्थिति को देखते हुए निर्माण से पहले विस्तृत तकनीकी जांच कराने की मांग की।

स्थानीय लोगों ने कहा कि शांति विहार क्षेत्र में कुछ भवनों में दरारें आने की शिकायतें सामने आई हैं। उन्होंने टनल और आवासीय भवनों के बीच दूरी की स्वतंत्र तकनीकी जांच कराने की मांग की। लक्ष्मीनारायण मंदिर सहित धार्मिक और सामाजिक महत्व वाले स्थानों की सुरक्षा का विषय भी बैठक में उठाया गया। लोगों ने प्रभावित परिवारों की संपत्ति को हुए नुकसान का उचित आकलन और नियमानुसार मुआवजे की मांग की।

बैठक में एनएचएआई के अधिकारी चंदेल और कपूर भी मौजूद रहे। अधिकारियों ने बताया कि फिलहाल संबंधित काम रोका गया है और आईआईटी रुड़की की विशेषज्ञ टीम जियो-टेक्निकल अध्ययन कर रही है। तकनीकी रिपोर्ट आने के बाद सुरक्षा संबंधी पहलुओं का आकलन कर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

सुरेश कश्यप ने कहा कि किसी व्यक्ति के लिए घर उसकी जिंदगी की सबसे बड़ी पूंजी होता है। घर बनाने में पूरी जिंदगी की कमाई लग जाती है। उन्होंने कहा कि विकास जरूरी है, लेकिन लोगों की जान और घरों की सुरक्षा से समझौता नहीं किया जा सकता।

कश्यप ने कहा कि प्रभावित परिवारों की संपत्ति को हुए वास्तविक नुकसान का उचित आकलन होना चाहिए। वह प्रभावित लोगों के मुआवजे का मामला केंद्रीय मंत्री और उच्च अधिकारियों के समक्ष उठाएंगे। उन्होंने प्रभावित क्षेत्र में रेस्टोरेशन का काम तेजी से कराने और निर्माण कार्य में तकनीकी विशेषज्ञों की निगरानी सुनिश्चित करने की जरूरत बताई।

उन्होंने कहा कि आईआईटी रुड़की की तकनीकी रिपोर्ट आने के बाद सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए ही आगे का काम होना चाहिए। स्थानीय लोगों को परियोजना की जानकारी देने और उनकी चिंताओं के समाधान के लिए जनसुनवाई किए जाने की जरूरत है।

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हिन्दुस्थान समाचार / उज्जवल शर्मा

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