हिमाचल में स्मार्ट मीटर विवाद गहराया, कर्मचारी संगठनों ने बिजली बोर्ड प्रबंधन पर साधा निशाना

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शिमला, 26 अप्रैल (हि.स.)। हिमाचल प्रदेश में स्मार्ट मीटर लगाने की प्रक्रिया को लेकर विवाद तेज हो गया है। बिजली कर्मचारियों और पेंशनरों के संयुक्त मंच ने बिजली बोर्ड प्रबंधन पर उपभोक्ताओं के खिलाफ दबाव और कठोर रवैया अपनाने के आरोप लगाए हैं। संगठनों ने कहा है कि स्मार्ट मीटर लगाने के नाम पर लोगों की बिजली काटने की धमकियां दी जा रही हैं, जो पूरी तरह अनुचित और जनहित के खिलाफ है।

रविवार को जारी एक संयुक्त बयान में विद्युत पेंशनर फोरम के वरिष्ठ उपाध्यक्ष कुलदीप खरवाड़ा, जेएसी के सह संयोजक हीरा लाल वर्मा, संरक्षक कामेश्वर शर्मा, राज्य अध्यक्ष नितीश भद्वाज और महासचिव प्रशांत शर्मा ने कहा कि बिजली बोर्ड एक सार्वजनिक सेवा संस्था है, लेकिन इसके बावजूद जिस तरह का व्यवहार अपनाया जा रहा है, वह सेवा भावना के विपरीत है।

उन्होंने आरोप लगाया कि उपभोक्ताओं को 24 घंटे के भीतर स्मार्ट मीटर लगाने के लिए मजबूर किया जा रहा है और ऐसा न करने पर बिजली काटने की चेतावनी दी जा रही है। संगठनों ने इसे अवैध और अस्वीकार्य बताया और कहा कि इस तरह का दबाव किसी भी स्थिति में सही नहीं ठहराया जा सकता।

बयान में यह भी कहा गया कि संगठन तकनीकी आधुनिकीकरण और सुधार के विरोध में नहीं हैं, लेकिन इसे लागू करने का तरीका पारदर्शी और जनहित में होना चाहिए। उन्होंने कहा कि उपभोक्ताओं को परियोजना की लागत, तकनीकी मानक, बिलिंग प्रणाली, डेटा सुरक्षा और शिकायत निवारण व्यवस्था के बारे में पूरी जानकारी देना जरूरी है, जो वर्तमान प्रक्रिया में नहीं किया जा रहा है।

संगठनों ने यह भी दावा किया कि स्मार्ट मीटर परियोजना से राज्य के उपभोक्ताओं पर लगभग 2500 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ सकता है। उन्होंने सवाल उठाया कि पहले 1800 करोड़ रुपये आंकी गई परियोजना अब 2600 करोड़ रुपये तक कैसे पहुंच गई।

इसके साथ ही उन्होंने बिजली बोर्ड पर निजी कंपनियों को काम सौंपने का भी आरोप लगाया। बयान में कहा गया कि स्मार्ट मीटर लगाने और नए बिजली कनेक्शन देने जैसे महत्वपूर्ण कार्य निजी कंपनियों को दिए जा रहे हैं, जिससे न केवल उपभोक्ताओं को असुविधा होगी, बल्कि बोर्ड की कार्यप्रणाली पर भी असर पड़ेगा।

संगठनों ने मांग की है कि उपभोक्ताओं को दी जा रही धमकियों और नोटिस को तुरंत वापस लिया जाए और स्मार्ट मीटर नीति को पारदर्शी, जनहित और भरोसेमंद तरीके से लागू किया जाए। उन्होंने यह भी कहा कि बिजली जैसे आवश्यक सेवा क्षेत्र में डर और दबाव की बजाय विश्वास और संवाद जरूरी है।

संयुक्त मंच ने स्पष्ट किया कि बिजली बोर्ड जनता की सेवा के लिए है और इसे किसी भी तरह के दबाव या निजी हितों का साधन नहीं बनाया जाना चाहिए।

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हिन्दुस्थान समाचार / उज्जवल शर्मा

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