2047 तक विकसित भारत का लक्ष्य, शिक्षा महाकुंभ में विज्ञान, तकनीक और कौशल विकास पर जोर

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2047 तक विकसित भारत का लक्ष्य, शिक्षा महाकुंभ में विज्ञान, तकनीक और कौशल विकास पर जोर


हमीरपुर, 10 अक्टूबर (हि.स.)। राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईटी), हमीरपुर में आयोजित राष्ट्रीय शिक्षा महाकुंभ-6.0 के दूसरे दिन विज्ञान, अनुसंधान, नवाचार और राष्ट्र निर्माण में शिक्षा की भूमिका पर व्यापक विचार-विमर्श हुआ। हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल कविंद्र गुप्ता ने मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की, जबकि पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर और कांगड़ा के सांसद डॉ. राजीव भारद्वाज विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। दूसरे दिन का केंद्रीय विषय ‘विज्ञानमय भारत–विकसित भारत’ रहा।

राज्यपाल कविंद्र गुप्ता ने कहा कि शिक्षा महाकुंभ शिक्षा, विज्ञान, अनुसंधान, नवाचार और राष्ट्र निर्माण को एक मंच पर जोड़ने का महत्वपूर्ण प्रयास है। विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने के लिए शोध, नवाचार और रोजगारपरक शिक्षा को बढ़ावा देना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि तेजी से बदलती तकनीक के दौर में विज्ञान की भूमिका महत्वपूर्ण हो गई है। शिक्षा का उद्देश्य केवल रोजगार प्राप्त करना नहीं, बल्कि युवाओं को रोजगार देने योग्य बनाना भी होना चाहिए। विद्यार्थियों को व्यावहारिक ज्ञान, वैज्ञानिक सोच और रचनात्मक कार्यों के लिए प्रेरित करना समय की जरूरत है।

सांसद डॉ. राजीव भारद्वाज ने कहा कि विज्ञान का लाभ समाज के सभी वर्गों, विशेषकर किसानों और मजदूरों तक पहुंचना चाहिए। भारत की वसुधैव कुटुंबकम् की भावना का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि विज्ञान का उद्देश्य मानव कल्याण होना चाहिए। चंद्रयान मिशन की सफलता का जिक्र करते हुए उन्होंने भारत की वैज्ञानिक उपलब्धियों को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि भारत स्टार्टअप के क्षेत्र में दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा इकोसिस्टम बन चुका है।

डॉ. भारद्वाज ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के सकारात्मक प्रभावों का उल्लेख करते हुए कहा कि विद्यार्थी अब पढ़ाई के साथ शोध और अनुसंधान पर भी ध्यान दे रहे हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि सामूहिक प्रयासों से वर्ष 2047 तक भारत को विज्ञानमय और विकसित राष्ट्र बनाने का लक्ष्य प्राप्त किया जा सकता है।

पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने कहा कि विकसित भारत के निर्माण के लिए स्पष्ट लक्ष्य, ठोस योजना और सामूहिक प्रयास जरूरी हैं। शिक्षा की गुणवत्ता और कौशल विकास पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि तकनीक के बढ़ते प्रभाव के बावजूद शिक्षकों की भूमिका महत्वपूर्ण बनी रहेगी। युवाओं को आगे बढ़ने के साथ भारतीय संस्कृति, मूल्यों और संस्कारों को भी बनाए रखना चाहिए।

उन्होंने कहा कि शिक्षा विद्यार्थियों को केवल रटने तक सीमित न रखे, बल्कि उनमें जिज्ञासा पैदा करे और नए विचारों पर काम करने के लिए प्रेरित करे। शिक्षकों की राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका है।

महाकुंभ में शिक्षाविदों, वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं और विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों ने भाग लिया। चर्चा में शिक्षा को विज्ञान, नवाचार, कौशल विकास और सामाजिक सरोकारों से जोड़ने पर जोर दिया गया।

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हिन्दुस्थान समाचार / सुनील शुक्ला

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